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नींद और चैन छोड़कर बुना सपना हुआ साकार, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने नालंदा के अमित कुमार

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:37 PM (IST)

इसलामपुर के तहबल बिगहा गांव के अमित कुमार ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का ...और पढ़ें

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने नालंदा के अमित कुमार

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने नालंदा के अमित कुमार

HighLights

  1. अमित कुमार इसलामपुर के तहबल बिगहा गांव के निवासी हैं।

  2. उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है।

  3. उनकी सफलता से माता-पिता और पूरे क्षेत्र में खुशी है।

संवाद सूत्र, इसलामपुर। सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए आंखों की नींद और मन का चैन छोड़कर मेहनत की जाए। प्रखंड के तहबल बिगहा गांव निवासी अमित कुमार ने अपनी लगन, अनुशासन और कड़ी मेहनत से इसे साबित कर दिखाया है।

साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनना उनके लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि बचपन से देखे गए देश सेवा के सपने का साकार होना है। उनकी सफलता से जहां माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है, वहीं पूरे इस्लामपुर क्षेत्र में खुशी की लहर है।

गांव की गलियों से सैनिक स्कूल तक का सफर

अमित ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हासिल की। बचपन से ही सेना में जाने और देश की सेवा करने का जुनून उनके भीतर था। इसी सपने को दिशा देने के लिए उन्होंने एक निजी विद्यालय में छह माह तक सैनिक स्कूल की तैयारी की।

उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2013 में सैनिक स्कूल के लिए उनका चयन हो गया। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश के कोरुकोंडा, विजयनगरम स्थित सैनिक स्कूल में शिक्षा ग्रहण की।

कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बीच अमित ने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। आखिरकार 29 मार्च 2025 को उनका चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ।

बेटे की सफलता से गांव में छाया उत्सव

अमित के सेना में अधिकारी बनने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार के साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। पिता बीरेन्द्र गोप और शिक्षिका मां इंदु कुमारी के लिए यह पल वर्षों के त्याग और उम्मीदों का फल लेकर आया। गांव लौटने पर नव-नियुक्त लेफ्टिनेंट अमित का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया।

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत को देते हुए अमित ने कहा कि देश की सेवा करना उनका बचपन का सपना था। कहा कि वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करेंगे।

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