कौन हैं 'गुफापर के राजा'? 50 साल पुरानी गणपति पूजा, इस बार बिहार में रौद्र रूप में दर्शन
बिहारशरीफ के गुफापर में गणेश चतुर्थी पर 'गुफापर के राजा' के रूप में भगवान गणेश की भव्य पूजा हो रही ...और पढ़ें

गुफापर के राजा
HighLights
गुफापर में 'गुफापर के राजा' गणेश की भव्य पूजा।
इस वर्ष भगवान गणेश रौद्र रूप में दर्शन दे रहे।
यह गणेश पूजा परंपरा 50 साल से अधिक पुरानी।
जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ(नालंदा)। गणेश चतुर्थी पर बिहारशरीफ में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। शहर के पुलपर स्थित गुफापर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश भव्य पंडाल में ‘गुफापर के राजा’ के रूप में विराजमान हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और सुख-शांति व समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
पूजा समिति से जुड़े अवधेश कुमार ने बताया कि यहां गणेश पूजा की परंपरा तीन दशक से भी अधिक पुरानी है।
पूर्वजों ने दिया ‘गुफापर के राजा’ नाम
अवधेश कुमार के अनुसार, पूजा समिति के पूर्वजों ने भगवान गणेश को ‘गुफापर का राजा’ नाम दिया था। तभी से स्थानीय लोग इसी नाम से गणपति की पूजा करते आ रहे हैं।
हर वर्ष पंडाल और पूजा को पहले से अधिक भव्य बनाने का प्रयास किया जाता है। इस बार भी आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही है।
इस बार रौद्र रूप में दर्शन दे रहे गजानन
इस वर्ष भगवान गणेश की प्रतिमा को रौद्र रूप में प्रस्तुत किया गया है। पंडाल में विशेष सजावट के साथ शंख ध्वनि और शिवनाथ के स्वरूप को भी महत्व दिया गया है।
विधि-विधान से प्रतिदिन पूजा-अर्चना होने के कारण पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। पुजारी उदय कुमार पांडेय ने बताया कि गुफापर में गणेश पूजा की परंपरा करीब 50 वर्षों से अधिक पुरानी है।
10 दिनों तक चलेगी विशेष पूजा
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से भगवान गणेश की विशेष पूजा शुरू होती है, जो करीब 10 दिनों तक चलती है। अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा की पूर्णाहुति होगी।
इसके बाद श्रद्धा और उल्लास के साथ गणपति की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। पूजा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है।
विद्या और सद्बुद्धि के लिए भी पूजे जाते हैं गणपति
पुजारी ने बताया कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है। इसी कारण किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि पहले विद्यालयों में भी चकचंदा यानी गणेश चतुर्थी से जुड़ा पर्व उत्साह से मनाया जाता था। गणेश पूजा सुख-शांति और समृद्धि के साथ विद्या, बुद्धि और सद्बुद्धि की प्राप्ति के लिए भी की जाती है। गुफापर में भक्ति गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
