बिहार होमस्टे योजना: घर में कमरे बनाने को सरकार देगी ₹10 लाख, पावापुरी समेत नालंदा के 6 स्थल शामिल
बिहार सरकार की मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना में पावापुरी जलमंदिर सहित नालंदा के छह प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल किए गए हैं।

घर में कमरे बनाने को सरकार देगी ₹10 लाख
HighLights
पावापुरी सहित नालंदा के छह स्थल योजना में शामिल।
स्थानीय परिवारों को होमस्टे के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी।
ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
बसंत, गिरियक। विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ पावापुरी आने वाले दिनों में केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार का भी नया मॉडल बनने जा रहा है। बिहार सरकार की मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना में पावापुरी जलमंदिर सहित नालंदा जिले के छह प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया है।
इस योजना के लागू होने से अब पर्यटक होटलों के साथ-साथ स्थानीय परिवारों के घरों में भी ठहर सकेंगे। इससे जहां पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और ग्रामीण जीवनशैली का वास्तविक अनुभव मिलेगा, वहीं स्थानीय परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
34 प्रमुख पर्यटन स्थलों का चयन
बिहार सरकार ने पर्यटन को नई गति देने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 16 जिलों के 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों का चयन किया है। इनमें सबसे अधिक छह स्थल नालंदा जिले से चुने गए हैं।
जिले के चयनित स्थलों में पावापुरी जलमंदिर, प्राचीन नालंदा महाविहार के भग्नावशेष, राजगीर रोपवे, जू सफारी, नेचर सफारी तथा विश्व प्रसिद्ध गर्म जलकुंड शामिल हैं।
क्या है होमस्टे योजना
होमस्टे का मतलब है कि स्थानीय लोग अपने घर के कुछ कमरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए तैयार करेंगे। पर्यटक होटल की जगह स्थानीय परिवारों के साथ रहेंगे, उनके खानपान और संस्कृति को करीब से जानेंगे। इससे पर्यटकों को अलग अनुभव मिलेगा और घर के मालिकों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया होगा।
पावापुरी को मिलेगा सीधा लाभ
हर वर्ष पावापुरी जलमंदिर में देश-विदेश से हजारों जैन श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। पर्व और छुट्टियों के दौरान यहां ठहरने की व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ जाता है। होमस्टे शुरू होने से पर्यटकों को अतिरिक्त आवास सुविधा मिलेगी। साथ ही आसपास के गांवों में रहने वाले परिवार भी पर्यटन से सीधे जुड़ सकेंगे।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि स्थानीय लोग इस योजना का लाभ उठाते हैं तो पावापुरी में धार्मिक पर्यटन के साथ ग्रामीण पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय पारंपरिक भोजन, परिवहन, गाइड सेवा और छोटे व्यापारियों की आय भी बढ़ेगी।
सरकार देगी आर्थिक सहायता
योजना के तहत चयनित पर्यटन स्थल से अधिकतम पांच किलोमीटर की दूरी के भीतर रहने वाले इच्छुक लोग होमस्टे इकाई स्थापित कर सकेंगे। प्रत्येक इकाई में अधिकतम आठ कमरों की अनुमति होगी। सरकार प्रति कमरे 2.50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। इस प्रकार एक संचालक को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान मिल सकेगा।
महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों तथा 18 से 25 वर्ष के युवा उद्यमियों को प्रति कमरे 25 हजार रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को पर्यटन आधारित स्वरोजगार से जोड़ना है।
पर्यटन के साथ गांवों का भी होगा विकास
पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में राज्यभर में एक हजार होमस्टे कमरों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा है। पावापुरी जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल पर इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से आसपास के गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
स्थानीय परिवारों की आय में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और गांवों की सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
होम स्टे योजना एक नजर में
- नालंदा जिले के छह पर्यटन स्थल योजना में शामिल।
- पावापुरी जलमंदिर प्रमुख लाभार्थी स्थलों में शामिल।
- पर्यटन स्थल से पांच किमी के दायरे में खुल सकेंगे होमस्टे।
- प्रति कमरे 2.50 लाख रुपये तक का अनुदान।
- अधिकतम आठ कमरों के लिए 10 लाख रुपये तक सहायता।
- महिला, स्वयं सहायता समूह और युवा उद्यमियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन।
- पर्यटकों को होटल के बजाय स्थानीय परिवारों के बीच रहने का अवसर मिलेगा।
