मुजफ्फरपुर। हर घर में शादी के बेकार कार्ड सहित अन्य कबाड़ मिल जाएंगे। लोग इन्हें कूड़े के हवाले कर देते हैं। लेकिन शिक्षक सुधीर कुमार ऐसा नहीं करते। इन बेकार चीजों को उपयोगी बनाकर लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं। इससे पेन स्टैंड सहित अन्य वस्तुएं बनाते हैं।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय चकिया, कुढ़नी में सहायक शिक्षक सुधीर के पिता अमरनाथ प्रसाद जिला समाहरणालय में वरीय सहायक थे। बचपन से ही बेटे को पढ़ाई के साथ कला के प्रति प्रोत्साहित करते थे। बेकार वस्तुओं के उपयोग के साथ स्वच्छता के प्रति जागरूक करते थे। इसका असर उन पर पड़ा। सुधीर 1999 में शिक्षक बने तो यूनिसेफ की ओर से कला समेकित अधिगम कार्यक्रम से जुड़ने का मौका मिला। यहां बेकार वस्तुओं के उपयोग की जानकारी दी गई। फिर तो पिता की सीख को साकार करने का रास्ता मिल गया। पहले उन्होंने कबाड़ के सामान से पेन स्टैंड तैयार किया। यह घर वालों और अन्य को बहुत पसंद आया। फिर तो कई ऐसे स्टैंड बनाए और लोगों को गिफ्ट किया। वे अब तक 75 लोगों को पेन स्टैंड उपहार में दे चुके हैं।

बच्चों को करते प्रेरित : सुधीर अपने स्कूल के साथ दूसरे सरकारी स्कूलों में भी समय-समय पर जाकर बच्चों को बेकार कागज, अखबार व कार्ड के उपयोग के लिए प्रेरित करते हैं। अब तक 500 से ज्यादा बच्चों को यह कला सिखा चुके हैं। उनके स्कूल के दर्जनों बच्चे कबाड़ से इस तरह के उपयोगी सामान बनाते हैं। पेन स्टैंड के साथ वे टोपी और एलबम आदि भी बनाते हैं।

ये सामान करते इस्तेमाल : वे घर में आए शादी कार्ड व सामान के डिब्बों का संग्रह करते हैं। पेन स्टैंड बनाने के लिए बेकार पेपर रोल के अंदर का हिस्सा, शादी कार्ड, फेविकोल, कलरफुल सेलो टेप और स्टेनर कलर का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा किसी को गिफ्ट करते हैं तो कंप्यूटर से उनका नाम और फोटो निकलवाकर स्टैंड पर चिपका देते हैं। इस तरह मामूली खर्च में शानदार उपहार तैयार हो जाता है।

मिल रही चौतरफा सराहना : सुधीर ने बीते मार्च में मुजफ्फरपुर आए जापान के सामाजिक कार्यकर्ता शाशाकी खांजी को पेन स्टैंड उपहार में दिया तो वे तारीफ करते नहीं थके। इसके अलावा मिथिला विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक सरदार योगेंद्र सिंह व पूर्व निदेशक डॉ. एएन कार गुप्ता, एनसीईआरटी नई दिल्ली में ड्रामा आर्ट इन एजुकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ.पवन सुधीर और जिला परिषद अध्यक्ष इंद्रा देवी सहित अन्य को हाथ से बनाए उपहार दे चुके हैं। सुधीर का मानना है कि इस तरह हम स्वच्छता का संदेश दे सकते हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी, ललन प्रसाद सिंह ने बताया कि -'कबाड़ को लाजवाब बनाने की पहल बहुत ही सराहनीय है। स्कूली बच्चे भी इस हुनर को सीख रहे हैं। उनकी पहल की जितनी सराहना की जाए कम है।'

By Jagran