सीतामढ़ी, जासं। धान की फसल कटने के बाद अब गेहूं की बुआई शुरू हो गई है। इसको लेकर खेत की जुताई की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया है कि किसान अब गेहूं की बुआई शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बुआई के लिए उन्नत प्रभेद के बीज का चयन करना चाहिए। ताकि उत्पादन बेहतर हो। अभी 10 दिसंबर तक किसान एचडी2967, एचडी 3086, एचडी 2733, एचडी 2824, सबौर समृद्ध्, डीडीडब्ल्यू 187, डीडीडब्ल्यू 39 प्रजाति के बीज की बुआई करें।

विलंब से बुआई करने वाले किसान सबौर श्रेष्ठ, एचडी 3118, डीबीडब्ल्यू 107, एचआई 1563, एचडी 2985, डब्ल्यूआर 544, डीबीडब्ल्यू 14 आदि को 11 से लेकर 30 दिसंबर तक बुआई कर सकते हैं। इस समय बुआई करने में प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बीज की मात्रा रखें। वहीं, विलंब से बुआई करने के दौरान 50 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज का उपयोग करें। बुआई से पहले बीजोपचार जरूरी है। उन्होंने बताया गेहूं की अधिक पैदावार के लिए प्रति किलोग्राम बीज में 2 ग्राम की दर से कार्वोडाजिम का प्रयोग कर बीज उपचार कर बुआई करें। बुआई के समय उर्वरक के रूप में प्रति कठ्ठा के हिसाब से 2 किलो डीएपी, एक किलोग्राम यूरिया तथा एक किलो जिंक सल्फेट का प्रयोग करें। खेत में खर पतवार न हो इसके लिए बुआई के तुरंत बाद पेडीमेथालिन 30 फीसद को 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं।

फसल वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद के अनुसार, डीएपी नहीं मिलने पर किसान डीएपी में मौजूद तत्वों को अलग-अलग लेकर भी खेत में डाल सकते हैं। इसके लिए किसान लिक्विड फास्फोरस का प्रति एकड़ एक लीटर उपयोग कर सकते हैं। इसी प्रकार पोटाश, नाइट्रोजन डाल सकते हैं। इसके अलाव पुराना गोबर भी खेत में डाल सकते हैं। इससे डीएपी की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। गेहूं के बेहतर उत्पादन के लिए पटवन भी जरूरी है। गेहूं की फसल में पहली सिंचाई शीर्ष जड़ निकलने के समय यानि बुआई के 20 से 25 दिन के बीच अवश्यक करें। सिंचाई के बाद दो किलोग्राम यूरिया प्रति कठ्ठा की दर से उपयोग करें। दूसरी सिंचाई बाली निकलने के पहने यानी बुआई के 75 से 80 दिनों के बीच करें। इस समय 2 किलोग्राम यूरिया डालना उचित होगा।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh