बगहा (पचं), जासं। पिछले पांच दिनों से चल रहे भीषण ठंड में लोग वैसे ही परेशान हैं। लेकिन, ठंड के साथ सब्जियों के बढते दाम ने लोगों को और परेशानी में डाल दिया है। जिससे आम से लेकर खास तक लगभग सभी लोगों का बजट बिगड़ गया है। स्थानीय बाजार में सब्जियों के दाम आसमान छू रही है।

सब्जियों के दाम पर एक नजर 

फूलगोभी : 25 से 30 रुपये, पत्तागोभी : 30 से 40 रुपये, मटर : 25 से 50 रुपये, बैगन 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि एक सप्ताह पहले तक इसकी कीमत काफी कम थी। ठंड की मार से परेशान जनता को सब्जी के दाम ने बजट बिगाड़ कर रख दिया है। हरा मिर्च से लेकर कद्दू, मूली आदि के साथ आलू और प्याज ने भी रुलाना प्रारंभ कर दिया है। खरीदारों का कहना है कि मौसम की मार का बहाना बनाते हुए सब्जी विक्रेता कीमत अधिक कर दिए हैं। जबकि आलू और प्याज पर तो कोई मौसम की मार नहीं है। वहीं कुछ लोग कोरोना का भी बहाना बना रहे हैं कि बाहर की मंडियों में कीमत बढ़ जाने के कारण ऐसी स्थिति हो रही है।

आलू प्याज के आढ़ती मो.आलम, साहेब कुमार, महबूब आलम ने कहा कि बाहर से आने वाले सामानों का आवक कम हो जाता है तो आने वाला सामान महंगा हो जाता है। जिसका असर आलू और प्याज पर देखने को मिल रहा है। एक सप्ताह पहले तक 50 रुपये पसेरी मिलने वाला आलू अभी 70 रुपये बिक रहा है। 90 रुपये बिकनी वाली प्याज 120 रुपये पसेरी बिक रही है। एक सप्ताह पूर्व हरी सब्जियां यथा पत्ता गोभी 10 से 15 वाला अब 20 से 30 में मिल रही है। जबकि 25 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने वाला मटर 40 से 50 रुपये बिक रहा है। टमाटर की कीमत भी उछाल मारते हुए 30 रुपो प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है।

कहते हैं खरीदार

नगर के शास्त्रीनगर निवासी नागेंद्र यादव ने कहा कि भीषण ठंड में जब आदमी परेशान हो रहा है तो उस वक्त सब्जी की मंहगाई भी परेशान करते हुए घर का बजट खराब कर दिया। जबकि, संक्रांति के बाद अक्सर ऐसा होता रहा है कि हरी सब्जियां हर किसी को आसानी से मिल जाती थी।

मंगलपुर के राज किशोर चौधरी ने कहा कि प्रत्येक साल इस मौसम में सब्जी का उत्पादन अधिक होने के कारण सस्ते मूल्य पर उपलब्ध हो जाता था। जिससे कि गरीबों की थाली में भी भोजन के समय रोटी या भात के साथ सब्जी सज जाती थी । इस वर्ष ऐसा हुआ कि महंगाई ने सीजन में भी थाली से सब्जी गायब कर दिया।

रामपुर के सुभाषनगर निवासी गोबरी चौधरी, चंद्रिका प्रसाद, कैलाश प्रसाद आदि ने कहा कि इस वर्ष हम गरीबों की थाली से सब्जी भी रूठ कर चली गई। कहां तक सावन भादो में पैसे की कमी से गरीब चटनी रोटी खाकर काम चला लेते थे। अब सीजन में भी वहीं स्थिति आ गई है।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh