मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत इससे संबद्ध सभी कॉलेजों को 31 जुलाई तक बंद करने का आदेश दिया गया है। हालांकि, सभी विभागाध्यक्षों, प्राचार्य और अधिकारियों को शारीरिक दूरी का पालन करते हुए अपने कार्यालय में रहने को कहा गया है। कुलपति प्रो.हनुमान प्रसाद पांडेय के आदेश से कुलसचिव डॉ.आरके ठाकुर ने सभी पीजी विभागाध्यक्षों और कॉलेज के प्राचार्यों को पत्र जारी कर दिया है।

कहा गया है कि कोविड-19 के तेजी से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देश के बाद विवि ने यह फैसला लिया है। कहा गया है कि सभी शिक्षक और कर्मचारी मुख्यालय में ही रहेंगे। मुख्यालय छोड़ने से पहले संबंधित अधिकारियों को सूचना देंगे। साथ ही घर से ही ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन करेंगे। समय-समय पर इसका रिपोर्ट राजभवन को दी जाएगी।

कर्मचारियों को कहा गया है कि वे घर पर रहें और जरूरत पड़ने पर उन्हें फोन कर कार्यालय बुलाया जा सकता है। बता दें कि विवि और कॉलेज खुलने के कारण विद्यार्थी विभिन्न कार्यों को लेकर पहुंच रहे थे। भीड़ को देखते हुए संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। इसके बाद सरकार की ओर से आदेश दिए जाने के बाद विवि ने यह फैसला लिया।

पदस्थापन में भेदभाव करने की शिकायत

बीआरए बिहार विवि की ओर से 15 विषयों में अतिथि शिक्षकों की पो¨स्टग के बाद राजनीति विज्ञान के अभ्यर्थी राजबली पासवान ने कुलपति से शिकायत की है। उन्होंने पो¨स्टग के लिए गठित कमेटी पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया है। कहा है कि मेधा क्रम में वे 20 वें स्थान पर थे। इसके बाद भी उनकी पो¨स्टग जंदाहा वैशाली में कर दी गई है। जबकि, 25वें स्थान के अभ्यर्थी को जिले के ही शहरी क्षेत्र के कॉलेज में नियुक्त किया गया है। साथ ही कुलपति से इसकी जांच कराकर शहरी क्षेत्र में पदस्थापन करने की मांग की है। इसकी प्रतिलिपि कुलाधिपति, अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग नई दिल्ली और पटना को भी दी है।

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