मुजफ्फरपुर, जेएनएन। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण के गुणगान के बीच एक ऐसी युवती की कहानी सामने आई है जिसने मानवता की वाकई मिसाल पेश की है। सड़क हादसे में दर्द से कराहतीं चाची-भतीजी को अस्पताल पहुंचाकर इसने बहादुरी और इंसानियत का परिचय दिया। भीड़ देख हनी ने अपनी गाड़ी रोकी और दोनों को अस्पताल ले गईं। इसके साथ ही उन्होंने अपने सपनों को ऊंची उड़ान देने के साथ देश का कल संवारने के लिए लीडरशिप की राह पर चल पड़ी हैं।

    चाहे वह देश की अर्थव्यवस्था को अपने योगदान से आगे बढ़ाने की बात हो या फिर बहादुरी और जज्बे की मिसाल कायम करने की। वह अपनी सहेलियों के बीच काफी सख्त मिजाज की मानी जाती हैं। लेकिन, उस हादसे ने उनके मन पर इतना गहरा असर डाला कि आगे लोगों की मदद की ठान ली। वह एलएस कॉलेज की काउंसिल मेंबर हैं और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं।

क्या हुआ था उस दिन

हनी बताती हैं कि पिछले साल की ही बात है। कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाने वाले सत्येंद्र सिंह की भतीजी व उनकी पत्नी मोतीझील मार्केट से खरीदारी कर लौट रही थीं। तभी सामने से तेज रफ्तार कोई बाइक सवार टक्कर मारते हुए निकल भागा। भीड़ जमा हो गई, लेकिन सभी तमाशबीन थे। दोनों के हाथ की हड्डी टूट चुकी थी।

   वहां रुकीं और सहेली पूजा की मदद से दोनों को अपनी कार में बैठाकर अघोरिया बाजार में डॉ. शैलेंद्र कुमार के क्लीनिक ले गईं। उनका इलाज कराया और उनके पति को फोन कर बुलाया। एक अपरिचित इंसान की मदद करने से मन में अजीब सी प्रसन्नता महसूस हुई। उसके बाद से ऐसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगीं।  

Posted By: Ajit Kumar

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