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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट बनाने और अवैध नियुक्ति मामले में सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार

By Ajit KumarEdited By:
Published: Sun, 29 May 2022 10:50 AM (IST)

आइटी सेल की मदद से विश्वविद्यालय थाने की पुलिस ने की कार्रवाई। आशीष विवेक के रूप में हुई पहचान थानाध्यक्ष ...और पढ़ें

वेबसाइट के माध्यम से नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार
वेबसाइट के माध्यम से नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। करीब तीन वर्ष पूर्व बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का वेबसाइट फर्जी तरीके से बना कर उस पर पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक की नियुक्ति को लेकर विज्ञापन जारी करने के मामले में पुलिस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शनिवार की देर रात विश्वविद्यालय पुलिस की ओर से की गई है। थानाध्यक्ष रामनाथ ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। कहा है कि आईटी सेल की मदद से आशीष  विवेक नामक व्‍यक्‍त‍ि को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि इससे पूर्व रजिस्ट्रार के पीए विक्रम और एलएनटी कालेज के कर्मचारी मनीष कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

यह था मामला

दिसंबर 2019 में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का फर्जी वेबसाइट brabumuz.com तैयार किया गया था। इसके माध्यम से परीक्षा नियंत्रक समेत तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के करीब 3000 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। जब अभ्यर्थी नियुक्ति के संबंध में जानकारी लेने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचने लगे तो विश्वविद्यालय के पदाधिकारियो को संदेह हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन कुलसचिव कर्नल एके राय ने विश्वविद्यालय थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। कुलसचिव ने इस में कहा था कि विश्वविद्यालय की ओर से किसी प्रकार की नियुक्ति नहीं निकाली गई है। असामाजिक तत्वों ने विश्वविद्यालय के नाम का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया है। यहां तक कि रजिस्ट्रार के सरकारी ईमेल और विश्वविद्यालय के कंप्यूटर से वेबसाइट को आपरेट करने की सूचना आईटी सेल के माध्यम से पुलिस के हाथ लगी।

वेबसाइट बनाने के लिए उपयोग किए गए मोबाइल नंबर की जब पड़ताल की गई तो वह रजिस्ट्रार के पीए विक्रम का निकला। वहीं अन्य नंबरों की पड़ताल के बाद मनीष की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस को उस में फर्जी नंबर के आधार पर जारी की सिम के बारे में भी जानकारी मिली थी। वही इस गिरोह में अन्य कर्मचारियों के शामिल होने की भी आशंका थी। पुलिस ने जांच जारी रखी इसी क्रम में शनिवार की देर रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।