मुजफ्फरपुर। संकल्प शक्ति का प्रतीक और अखंड सौभाग्य की कामना का परम पावन व्रत हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। मान्यता है कि इसदिन जो महिलाएं विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा से व्रत करती हैं, वे अपने मन के अनुरूप पति को प्राप्त करती हैं। साथ ही यह पर्व दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है। हरिसभा चौक स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी पं.रवि झा व रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पं.रमेश मिश्र बताते हैं कि यह व्रत नारी के सौभाग्य की रक्षा करने वाला है। इस व्रत को सौभाग्यवती स्त्रिया अपने अक्षय सौभाग्य और सुख की लालसा के लिए श्रद्धा, लगन और विश्वास के साथ मनाती हैं। कुंवारी लड़किया भी अपने मन के अनुरूप पति प्राप्त करने के लिए इस पवित्र पावन व्रत को करती है। 'हर' भगवान भोलेनाथ का ही एक नाम है और चूंकि शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां पार्वती ने इस व्रत को रखा था, इसलिए इस पावन व्रत का नाम हरतालिका तीज रखा गया। मान्यता है कि जो भी महिलाएं सभी पापों और सासारिक तापों को हरने वाले इस व्रत को विधिपूर्वक करती हैं, उनके सौभाग्य की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। पंडितों के अनुसार, इस बार सुबह से लेकर दिनभर पूजा का मुहूर्त है।

फल बाजार में आई तेजी

पर्व को लेकर इस बार फल बाजार में भी तेजी आई है। फलों के दाम चढ़े हुए हैं। अन्य दिनों में 15 से 20 रुपये किलो बिकने वाला खीरा मंगलवार को जहां 40 से 50 रुपये किलो तक बिका। वहीं केला के दाम में भी 15 से 20 रुपये दर्जन तक तेजी रही। सेव, नाशपाती, अमरुद आदि फलों के दाम भी बढ़े हुए हैं।

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