पूर्वी चंपारण, जेएनएन। तीन साल पूर्व आइएसआइ के इशारे पर घोड़ासहन स्टेशन के आउटर सिगनल के पास आइईडी लगाकर ट्रेन उड़ाने की साजिश करनेवालों पर शिकंजा कसने लगा है। पटना स्थित एनआइए की विशेष अदालत में आरोपितों के खिलाफ गवाही शुरू हो गई है। अभी जिले के एक दारोगा रणधीर कुमार की गवाही हुई। आगे अन्य लोगों की गवाही होगी। एसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि की। कहा कि मामले को एनआइए देख रही है। इसलिए जिला पुलिस के पास खास जानकारी नहीं है।

 गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 2016 को ट्रेन उड़ाने की साजिश को स्थानीय युवकों ने बम देखने के बाद नाकाम कर दिया था। ट्रेन को बम से थोड़ी दूर पहले ही रोक दिया था। रेल पुलिस मामले की जांच कर रही थी। इसी बीच 14 जनवरी 2017 को जिले के आदापुर निवासी आरएस ने थाने में अपने भाई व भतीजा क्रमश: अरुण राम और दीपक राम के हत्या की प्राथमिकी चार लोगों के खिलाफ दर्ज कराई। बताया था कि 25 दिसंबर को चारों ने दीपक व अरुण की नेपाल ले जाकर हत्या कर दी।

 मामला दर्ज होने के बाद रक्सौल के तत्कालीन डीएसपी राकेश कुमार ने छापेमारी की। इसमें नामजद आदापुर निवासी मोतीलाल पासवान, झिटकहिया निवासी और रक्सौल के गम्हरिया निवासी उमाशंकर पटेल को गिरफ्तार किया था। मोतीलाल ने पुलिस के समक्ष कहा था कि घोड़ासहन में आइईडी आइएसआइ के इशारे पर लगाया गया था। रिमोट अरुण व दीपक को दबाना था। इसके लिए दोनों को तीन लाख रुपये दिए थे।

 विस्फोट नहीं हुआ तो दुबई में बैठे सरगना नेपाल के कलेया निवासी शम्शुल होदा के इशारे और उसके साथी कलेया के ही ब्रजकिशोर गिरि के कहने पर दोनों की नेपाल में हत्या कर दी गई। मोतीलाल ने कानपुर रेल ट्रैक विस्फोट में संलिप्तता स्वीकारी थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आईं। मोतिहारी में आरोपितों से पूछताछ के बाद। घटनास्थल का जायजा लिया था। एनआइए ने आइईडी लगाने को लेकर रक्सौल रेल थाने में दर्ज कांड और आदापुर दोहरे हत्याकांड की फाइल को खंगाला। पांच जेल गए। जुलाई में एनआइए ने छह लोगों पर आरोप-पत्र विशेष अदालत में दाखिल किया। अब गवाही शुरू हो गई है। 

Posted By: Ajit Kumar

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