मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय स्नातक कोर्स चार से पांच वर्षों में पूरा हो रहा है। इसके बाद पेंडिग रिजल्ट का चक्कर फंसा तो एक दो वर्ष और समय लग ही जाएगा। किसी तरह पास कर गए तो डिग्री के लिए आवेदन के बाद चार से पांच वर्षाें का समय लग सकता है। विवि की इस लापरवाही के कारण प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगता है। इसपर राजभवन ने सख्ती दिखाई है। राजभवन की ओर से कहा गया है कि हर हाल में सत्र को नियमित करें। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेकर स्मार्ट प्लानिग तैयार करें। विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले सप्ताह भी राजभवन की ओर से इसपर रिमाइंडर भेजा गया है। विवि में पिछले पांच वर्षों में चार कुलपति बदल गए, पर सत्र नियमित करने की दिशा में किया गया कोई भी प्रयास अबतक सफल नहीं हुआ है। कॉलेजों में कक्षाओं की हालत दयनीय है। विवि के विभाग रजिस्ट्रेशन से लेकर परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।

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सत्र का यह है हाल :

स्नातक सत्र 2019-22 के प्रथम वर्ष की परीक्षा अबतक नहीं हुई है। 2020-23 में नामांकन लेने वाले छात्रों का एक वर्ष बीत जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन ही चल रहा है। इसकी परीक्षा कब होगी इसका कोई अता-पता नहीं। पीजी में इसबार 2020-22 सत्र में नामांकन लिया जाएगा। छात्र-छात्राएं इस कोर्स में वर्तमान नहीं एक वर्ष पूर्व के सत्र में नामांकन लेंगे। कई वोकेशनल कोर्स भी आउट ऑफ ट्रैक हैं।

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प्रतिवर्ष दो लाख विद्यार्थी लेते हैं नामांकन :

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष स्नातक में 1.42 लाख, पीजी में 5350, वोकेशनल में करीब 10 हजार के अलावा लॉ, बीएड और मेडिकल कोर्स को मिलाकर करीब दो लाख विद्यार्थी दाखिला लेते हैं।

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बयान :

सत्र नियमित करना विवि की प्राथमिकता में शामिल है। राजभवन की ओर से सत्र नियमित करने को लेकर एक सप्ताह पूर्व रिमाइंडर भेजा गया है। इसी को ध्यान में रखकर सत्र 2019-22 के विद्यार्थियों के प्रथम वर्ष की परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। कोर्स विलंब नहीं हो इसके लिए अन्य योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

- प्रो.रवींद्र कुमार, प्रतिकुलपति, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय

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