मुजफ्फरपुर, जेएनएन। सड़क पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई जिंदगी खत्म हो रही हैं तो कई की अपाहिज बनकर बोझ बन गई है। हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की मुख्य वजह है। वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार, नशे में ड्राइविंग, हेलमेट का प्रयोग नहीं करना, चारपहिया में सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करना समेत कई असावधानी से हादसे होते हैं। ट्रैफिक का लोड सड़क पर बढ़ता जा रहा है। पैदल चलना भी मुश्किल होता जा रहा है।

 ड्राइविंग करते समय गति सबसे बड़ा फैक्टर होता है। अक्सर देखा जाता है कि रोड अच्छी होने पर ड्राइवर स्पीड बढ़ा लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। ये भी हादसे की बड़ी वजह है। एमवीआइ दिव्य प्रकाश कहते हैं कि यातायात नियमों के प्रति जागरूकता काफी जरूरी है। लोगों को यह समझना होगा कि कानून का असल मकसद उनकी जान-माल की सुरक्षा करना है। 

 नियमों का हो पालन तो कम हो जाएंगे सड़क हादसे 

दुर्घटनाओं का कारण यातायात नियमों का उल्लंघन है। लोग इतनी जल्दी में रहते हैं कि वे नियमों को नजरअंदाज करते हैं। इससे वे अगल-बगल या आमने-सामने से आ रहे वाहनों से जा भिड़ते हैं। 

सिर पर चोट जानलेवा, हेलमेट का हो प्रयोग 

 सिर पर चोट लगना जानलेवा होता है। इससे बचाव के लिए हेलमेट का प्रयोग जरूरी है। हेलमेट से मानव जीवन की काफी सुरक्षा होती है। इसे पहनने से सिर का काफी हद तक बचाव होता है तथा मनुष्य ब्रेन-डेथ का शिकार होने से बच जाता है। मानव जीवन काफी अमूल्य है। इसकी जितनी संभव हिफाजत की जाए, उचित रहता है। अपने परिवार को बेसहारा छोडऩा तो नासमझी ही कहा जाएगा। 

ओवरटेक से करें बचाव, नियंत्रण में हो वाहन 

सड़क पर ड्राइविंग के समय ओवेरटेक नहीं करें। ड्राइव करते समय रेस नहीं लगाए. यह जरूरी नहीं कि कोई आपसे आगे निकल गया, तो आप भी उससे आगे निकलें और यातायात के नियम को तोड़े. अगर आप यातायात के नियम का पालन करते हुए गाड़ी चलाते हैं, तो यह आपके साथ-साथ दूसरों के लिए भी अच्छा होगा।

हार्न का कम हो उपयोग, कम क्षमता वाले का ही करें प्रयोग

सड़क पर अनावश्यक हॉर्न का उपयोग नहीं करना चाहिए। लगातार हॉर्न बजाने से आगे लगा जाम जल्दी क्लियर हो जाएगा, इससे सिर्फ सामने वाले व्यक्ति पर दबाव बनता है और ध्वनि प्रदूषण फैलता है। इससे अच्छा होगा कि आप थोड़ा इंतजार करें और सामने वाले को निकलने का मौका दें। वाहनों में कम आवाज वाले हार्न का ही प्रयोग करें। 

लेन में ही चलें, आगे की गाड़ी से बनाएं दूरी 

वाहन को हमेशा लेन में चलाएं। आगे वाली गाड़ी से एक निश्चित दूरी बनाए रखें। इससे आगे वाली गाड़ी अचानक अगर रुकती है तो आप गाड़ी से टकराने से बच सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति समय बचाने को लेन तोड़ता है तो वह आने वाले वाहनों को भी प्रभावित करता है। यू-टर्न ड्राइवर का अधिकार नहीं है। ये बस ड्राइवर की सुविधा के लिए बना होता है। जब भी आप यू-टर्न पर हों तो आगे पीछे के ट्रैफिक को देख लें, इसके बाद ही यू-टर्न लें। अगर आप हाथ सिग्नल का उपयोग करते हैं तो यह आपके पीछे चल रहे व्यक्ति के लिए सुविधा होती है? इससे आपके पीछे चल रहा व्यक्ति आपकी साइड को समझ कर सेफ ड्राइविंग कर सकता है।

नियमों को तोडऩा पड़ सकता महंगा 

वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों को तोड़ा जाता है। कई बार अनजाने में तो कई बार जानबूझकर। ऐसे में जोखिम मोल लेना तो है ही, साथ में सामने वाले को भी खतरे में डाल देता है। इससे कई बार बड़ी दुर्घटनाएं हो जाती हैं। परिवहन विभाग में यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश फाइल में, जुगाड़ गाड़ी पर नहीं लगाम 

सर्वोच्च न्यायालय ने जुगाड़ गाड़ी पर प्रतिबंध लगाया है। इसका परिचालन बंद करने का आदेश सभी डीटीओ को दिया गया, लेकिन यह आदेश फाइल तक ही सिमट गया है। जिले में जुगाड़ वाहन बिना रोक-टोक चल रहे हैं। ये ओवरलोड होकर शहर की सड़कों पर चलते हैं। इससे भी हादसे होने की संभावना बनी रहती है। 

नशे में चालक-खलासी, जंग खा रही करोड़ों की मशीन

सड़क हादसे की एक बड़ी वजह नशे में ड्राइविंग भी है। अधिकतर चालक नशे में ड्राइविंग करते हैं। इससे वे अनियंत्रित होकर हादसों को दावत दे रहे हैं। चालकों के नशे में होने की जांच के लिए वर्षों पूर्व परिवहन विभाग को अल्कोहल टेस्टिंग मशीन दी गई थी। इससे चालक व खलासी की जांच करनी थी, मगर मशीन जंग खा रही है। इधर, नशे से जिंदगियां खत्म हो रही हैं। 

कार में गर्मी की चाहत, जान के लिए आफत

ठंड से बचाव के लिए कार में हीटर, एसी व ब्लोअर का इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है। भले ही ये ठंड से राहत देते हों, मगर इसका परिणाम स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता। ब्लोअर व हीटर का प्रयोग तो जानलेवा भी हो सकता है। बच्चों को लेकर सफर करते समय तो खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर इसे चलाने की जरूरत पड़े भी तो काफी सतर्क रहें। जरा सी चूक आपकी कार को कार्बनडाई, सल्फर व नाइट्रोजन ऑक्साइड के गैस चैंबर में तब्दील कर सकती है, जो पलभर में दम घोट सकती है।

 अभिभावकों को ध्यान देना होगा कि छोटे बच्चों को कार में अकेला न छोड़ें। ब्लोअर चलाएं तो कार का शीशा थोड़ा जरूर खुला छोड़ दें। शीशा पूरी तरह बंद रहने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे दम घुट सकता है। ठंड के दिनों में औसतन लोग हीटर, ब्लोअर व एसी का प्रयोग करते हैं। इससे उनकी जान पर खतरा मंडराता रहता है। 

ये बरतें सावधानियां 

- कार के टेंपरेचर मीटर और कूलिंग सिस्टम की जांच कराएं।

- कार की सर्विसिंग नियमित कराएं।

- गड़बड़ी पर उसे तुरंत ठीक कराएं।

- सेंट्रल लॉक सिस्टम 

नियमित चेक कराएं।

- धूमपान का प्रयोग बिल्कुल नहीं करें।

- कार में अग्निशमन यंत्र रखें।

- कार का शीशा थोड़ा खुला रखें। 

इस बारे में डीटीओ मो. नजीर अहमद ने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा अभियान चलाकर नियमों को तोडऩे वालों पर कार्रवाई की जा रही है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

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