मुजफ्फरपुर, जेएनएन। कोरोना काल में जिस तरह बचाव के उपायों के साथ वोट पड़े, उम्मीद है कि उसी तरह मतों की गिनती भी शांतिपूर्वक ढंग से पूरे एहतियात के साथ पूरी होगी पिछले डेढ़ माह से बिहार में चल रही विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया रोमांचक दौर में पहुंच गई है। मंगलवार को सुबह आठ बजे से शुरू हो रही मतगणना दोपहर तक लगभग संकेत दे देगी कि राजग और महागठबंधन में किसे मतदाताओं ने राज्य, जिले, शहर, गांव और स्वयं के विकास के लिए चुना है। जिस तरह कोई बड़ी घटना के बिना तीन चरणों में मतदान सम्पन्न हो गया, उसी तरह दस नवंबर को सुबह से रात तक चलने वाली मतगणना के भी शांति से निपटने की उम्मीद की जानी चाहिए। इसके लिए हर जगह मतगणना केंद्रों पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। मतगणना पूरी होने तक सभी जिलों में निषेधाज्ञा लागू करने के निर्देश पहले ही जारी हो चुके हैं।

चुनाव आयोग से यह आदेश भी जारी किया गया है कि इस बार मतगणना के बाद विजयी प्रत्याशियों के समर्थक जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। आयोग के इस आदेश के कई मायने हैं। पहला यह कि चुनावी प्रक्रिया कोरोना काल में पूरी जरूर हो गई है, परंतु संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। दूसरा यह कि पिछले चुनावों तक प्रत्याशी जीतने पर उसके समर्थक इतने उतावले हो जाते थे कि वे भीड़ इकट्ठा कर जश्न मनाने लगते थे। कोरोना काल में इसकी छूट दी जाती तो बचाव के मानकों का उल्लंघन जरूर होता। ऐसी परिस्थिति में संक्रमण की गति देर-सबेर बढ़ेगी तो इसका खामियाजा प्रशासन को ही उठाना पड़ेगा। तीसरा जीत के जश्न में जिस तरह आतिशबाजी और सड़कों पर हो-हंगामा होता है, उससे प्रदूषण बढ़ने के अलावा अप्रिय वारदात की आशंका भी रहती है।

ऐसी दशा में चुनाव आयोग का नतीजों के बाद हंगामे पर सख्ती से रोक लगाने के लिए जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश देना सर्वथा उचित कदम है। कोरोना के मद्देनजर राजनीतिक दलों व कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक गतिविधियां कतई नहीं करने की चेतावनी दी गई है। बहरहाल, 38 जिलों में बनाए गए 55 मतगणना केंद्रों पर विधानसभा की 243 सीटों के लिए मतगणना की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह सकुशल निपट जाए, आम-अवाम से यही सहयोग की अपेक्षा है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal