बगहा, जासं। बीते सात दिनों से वनकर्मियों की पकड़ से दूर बाघ लगातार अपना लोकेशन बदल रहा है। फिलहाल बाघ कटहां गांव के सरेह में डेरा जमाए हुए है। रात में इसी गांव के एक घर के पास डेरा जमाए हुए था। बताते चलें कि सोमवार की सुबह बाघ को चिउटाहां वन क्षेत्र के मैनाहां गांव के सरेह में देखा गया था। लेकिन शाम ढ़लते ही बाघ ने अपना लोकेशन बदल लिया और वो सखुआटी गांव के सरेह में जा पहुंचा। बाघ के पगचिन्हों के आधार पर लगातार उसे ट्रेस करने में जुटी वन विभाग की टीम इसको लेकर काफी सतर्क हो गई और पटना से आई विशेषज्ञों की टीम के साथ स्थानीय वन कर्मियों की टीम सखुआटी गांव के सरेह में पहुंच गई। रात के करीब 11 से 12 बजे तक बाघ को ट्रेस करने की कोशिश की गई। लेकिन बाघ का कोई अता पता नहीं चला। वहीं सुबह होते होते बाघ ने अपना लोकेशन फिर से बदला और अब सखुआटी गांव आगे कटहां गांव के सरेह में जा पहुंचा। जहां सुबह करीब सात बजे एक गन्ने के खेत में उसका लोकेशन पाया गया।

कटहां गांव के एक घर के समीप रात भर डेरा डाले रहा बाघ

इधर कटहां गांव में बाघ के घुसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त है। कटहां गांव निवासी व अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व सदस्य अरविंद उरांव ने बताया कि सोमवार की रात में बाघ कटहां गांव निवासी सूरज उरांव के घर के समीप आ पहुंचा था। जहां उनके घर के समीप रात में काफी देर तक बैठा रहा। लेकिन घर के सदस्य रात में घर से बाहर नहीं निकले, जिससे उन्हें पता नहीं चल पाया। सुबह में सूर्य की किरण निकलने के बाद जब ग्रामीण घर के लोगों ने दरवाजा खोला और बाहर निकलें तो देखा कि बाघ घर के समीप ही बैठा था। जिससे उनके होश उड़ गए। वन विभाग की टीम भी वहां जा पहुंची है और बाघ को ट्रेस करने में जुट गई है। इधर पूर्व सदस्य श्री उरांव ने बाघ के गांव में घुसने से चिंता जताई है। कहा कि बाघ को अगर शीघ्र पकड़ा नहीं गया तो यहां भी वो खतरा कर सकता है। ऐसे में उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से बाघ को शीघ्र पकड़ने की बात कही है।

गांव के सरेह में गन्ने के खेत मे बाघ के होने की सूचना

बाघ के पगमार्क से पता चला है कि वो फिलहाल कटहां गांव के सरेह के एक गन्ने के खेत में बैठा था। लेकिन वहां से फिर मूव कर गया है। हालांकि अभी भी उसके गन्ने के खेत में होने की आशंका जताई जा रही है। इस क्षेत्र में एम्बुसिंग लगाकर प्रशिक्षित टीम द्वारा उसे सर्च किया जा रहा है। बाघ को ट्रेस करके शीघ्र ही ट्रेंकुलाइज किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि रविवार की दोपहर उक्त बाघ ने मैनाहां के सरेह में एक सुअर का शिकार किया था। जबकि बाघ को पकड़ने के लिए चारा के रूप में डाली गई एक बकरी को भी बाघ उठा ले गया था। हालांकि उसके बाद से बाघ ने अभी तक कोई शिकार नहीं किया है। जिससे वनकर्मियों की टीम पुराने और नए ठिकाने पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सोमवार की रात वनकर्मियों की टीम में आग जलाकर बाघ को ट्रेस करने की कोशिश की। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इधर बाघ के इतने मोमेंट के बावजूद भी वीटीआर की ट्रेंक्यूलाइज एक्सपर्ट व टीम उसे ट्रेंक्यूलाइज कर पकड़ने में असमर्थ दिखी। जिसके बाद राजधानी पटना से चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन प्रभात कुमार गुप्ता के नेतृत्व में, वेटनरी चिकित्सक समरेंद्र कुमार, हैदराबाद के प्रसिद्ध निशानेबाज एवं ट्रेंक्यूलाइज एक्सपर्ट शूटर नवाब शफात अली खान के साथ इकोलॉजी डायरेक्टर सुरेंद्र सिंह की टीम बाघ को पकड़ने के लिए पहुंची हुई है। जो फिलहाल कटहां गांव के सरेह में बाघ को रेस्क्यू करने में जुटी हुई है। इधर वनकर्मियों की टीम वनवर्ती गांवों में लगातार प्रचार प्रसार भी कर रही है कि ग्रामीण जंगल के करीब सरेह में न जाएं। ताकि बाघ को भी आसानी से पकड़ा जा सके। 

Edited By: Ajit kumar

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