मुजफ्फरपुर। किसानों की आर्थिक उन्नति मे रसायन रहित लीची का उत्पादन सहायक होगा। अगर इस सलाह पर अमल किया जाए तो वह दिन दूर नहीं जब हम विश्व में लीची निर्यात कर वहां के लोगों का इसका स्वाद चखा सकेंगे। उक्त बातें राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मे आयोजित कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि डॉ. अंजनी कुमार सिह निदेशक कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान पटना ने कहीं। कहा कि इस केंद्र ने वैज्ञानिकों ने अपने नए शोधों से यह प्रमाणित किया है कि तकनीक की जानकारी लेकर किसान इस चुनौती को पूर्ण कर सकते हैं। बस जरूरत है कुछ विशेष जानकारी पर ध्यान देने की जिसमें प्रमुख है कीट एवं व्याधि प्रबंधन, फलों के प्रतिरोधी प्रजातियों का विकास, क्षत्रक प्रबंध, पोषण प्रबंध, जैविक उपादान, परागण प्रबंध कीटनाशी अवशेष का निराकरण सहित समेकित कृषि प्रणाली द्वारा रसायन मुक्त फल उत्पादन करने की। ताकि विश्व के बाजार में हमारे उत्पादन की मांग अधिक हो और हम अपने उत्पादन को अधिक से अधिक मात्रा में विदेशों में निर्यात कर सकें। 10 दिवसीय प्रशिक्षण में पांच राज्यों के सात कृषि विवि, कृषि विज्ञान केंद्रों एवं कृषि उत्पादन संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इनमें केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू, गोविंद बल्लभ पंत कृषि विवि पंतनगर, शेरे कश्मीर कृषि विवि जम्मू, ओडिसा कृषि विवि, डॉ. राजेंद्र कृषि विवि पूसा, कृषि अनुसंधान परिषद पटना, मखाना शोध केंद्र दरभंगा एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुशहरी के वैज्ञानिकों ने अद्यतन जानकारी को साझा किया। मुख्य अतिथि द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान किया गया। मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. विशाल नाथ, मुख्य समन्वयक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव, डॉ. एसडी पांडेय, डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. नारायण लाल, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. अलेमवती पोंगेनर, डॉ. अभय कुमार, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. इवनिंग स्टोन मार्बो एवं रामजी गिरी मौजूद रहे। संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके पटेल ने किया।

Posted By: Jagran

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