मुजफ्फरपुर : समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के लिए भाकपा (माओवादी) संगठन के हार्डकोर नक्सली सुबोध बैठा ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण किया। वह सरैया के मड़वा पाकर का रहने वाला है। एएसपी अभियान विजय शंकर सिंह, एसएसबी 32वीं बटालियन के कंपनी कमांडर कुमार ऋतुराज और विशेष शाखा के पदाधिकारी विनय कुमार सिंह ने उसे आत्मसमर्पण कराने में अहम भूमिका निभाई। उसके खिलाफ सरैया, कुढ़नी, मोतीपुर, बरूराज, सरैया और रेल थाने में कई विध्वंसक नक्सली वारदात को अंजाम देने का मामला पूर्व से दर्ज हैं। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया। संगठन व अपने साथियों की उसने कुछ अहम जानकारियां दी हैं। इस दिशा में पुलिस व एसएसबी टीम आगे की कार्रवाई कर रही है।

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कई नक्सली वारदात को दे चुका अंजाम : नक्सली सुबोध कई विध्वंसक वारदात को अंजाम दे चुका है। इसमें मुख्य रूप से तुर्की में रेलवे लाइन निर्माण कंपनी के बेस कैंप पर हमला कर वाहनों को फूंक दिया था। यह घटना 2016 में घटी थी। इसके अलावा मोतीपुर में 2015 में सड़क निर्माण कंपनी के बेस कैंप पर खड़े वाहनों को फूंक दिया था।

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सीमेंट लदे ट्रक में पेट्रोल छिड़क लगा दी थी आग : सरैया में सीमेंट लदे ट्रक पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी थी। बरूराज में विध्वंसक गतिविधि में भी वे शामिल रह चुका है। वहीं से नक्सली पर्चा, हथियार, चोरी के वाहन समेत अन्य अवैध सामान जब्त किए गए थे। सरैया से नक्सली पर्चा, डेटोनेटर, हथियार और गोली बरामदगी मामले में भी उसकी संलिप्तता सामने आई थी।

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संगठन को अंदर ही अंदर कर रहा था मजबूत : नक्सली संगठन से जुड़ने के बाद सुबोध अंदर ही अंदर इसे काफी मजबूती दी थी। वैशाली में भी उसने कई जगहों पर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। संगठन में उसकी जिम्मेदारी पार्टी मीटिंग में शामिल होना, नक्सली वारदात को अंजाम देना, नक्सली पर्चा चस्पा करना व बांटना था। वह संगठन का सक्रिय सदस्य था।

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मुखिया के चुनाव में मिली थी हार : 2016 में वह अपनी पंचायत से मुखिया का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन, उसे सौ से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उसने दोबारा राजनीति की तरफ रुख नहीं किया। वह नक्सली संगठन के जोनल कमांडर रामप्रवेश बैठा और एरिया कमांडर रोहित सहनी से जुड़ा हुआ था। ये दोनों जेल में बंद हैं। इन दोनों के साथ मिलकर उसने कई विध्वंसक वारदात को अंजाम दिया है।

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योगदान देने के साथ मिली उपलब्धि : जिले में नए एएसपी अभियान के पद पर विजय शंकर सिंह ने योगदान देने के साथ एक हार्डकोर नक्सली को आत्मसमर्पण कराने में सफलता हासिल की। उनसे पूर्व इस पद पर विमलेश चंद्र झा थे। उनके तबादले के बाद इन्होंने योगदान दिया है।

Posted By: Jagran

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