मुजफ्फरपुर, {अमरेंद्र त‍िवारी}। पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों के लिए एक खेल गैलरी बनेगी। दीवार पर अलग-अलग जानवरों व पौधे का चित्र बनाया जाएगा। वार्ड में बेसिन लगाया जाएगा। केंद्र को सुसज्जित करने के लिए यह सुझाव पटना मेडिकल काॅलेज एंड अस्पताल (पीएमसीएच) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की सीनियर न्यूट्रिशियन काउंसलर नाहिदा समन ने दिया। केंद्र का निरीक्षण कर वहां इलाजरत बच्चों का वजन किया। सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक प्रवीण कुमार के साथ वहां की व्यवस्था की समीक्षा की। माताओं को हाथ धोने के तरीके बताए। अपने बच्चे की इलाज करा रही सकरा की सीमा कुमारी ने बताया कि स्वच्छता के संबंध में जो जानकारी मिली, उसको वह नियमित अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगी। सिविल सर्जन कार्यालय के प्रभारी चिकित्सक डा.सीएस प्रसाद को नाहिदा ने फीडबैक दिया। डा. प्रसाद ने बताया कि पोषण केंद्र के लिए जो सुझाव दिए गए है। उसकी व्यवस्था होगी। डा.प्रसाद ने कहा कि केंद्र की व्यवस्था का मूल्यांकन टीम ने किया। वह सीएस को इसकी जानकारी देंगे।

कुपोषण के कारण असमय होती मौत

नाहिदा ने बताया कि कुपोषण के कारण बच्चों का विकास थम जाता है। देशभर में 42 प्रतिशत बच्चों में कुपोषण की शिकायत पाई जाती है। इससे उनका विकास प्रभावित होता है। इसके अलावा 36 प्रतिशत ऐसे बच्चे होते हैं, जिनका कुपोषण के कारण वजन कम होता है। कुपोषण के कारण पांच प्रतिशत बच्चों की असमय मौत होने की आशंका बनी रहती है। कुपोषित बच्चों के लिए राज्य सरकार की सहायता से पुनर्वास केंद्र चल रहा हैं। यहां 0 से 5 साल के बच्चों को रखा जाता है।

कटरा पीएचसी प्रभारी से सीएस ने मांगा जवाब

मुजफ्फरपुर। जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सक व प्रभारी से जवाब मांगा गया है। सिविल सर्जन डा. यूसी शर्मा ने बताया कि कांटी में हुई विभाग की समीक्षा बैठक में कटरा के पीएचसी प्रभारी व कुढऩी और बोचहां के स्वास्थ्य प्रबंधक, रैया के प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक शामिल नहीं हुए। सभी लोगों से अनुपस्थित रहने के संबंध मेें जवाब मांगा गया है। सीएस ने कहा कि यह एक चेतावनी है। जिले में चलने वाली सरकार की योजना का समय पर पूरी करनी है। हर पीएचसी में रोस्टर लागू होनी चाहिए तथा उसका पालन हो। संस्थागत प्रसव ज्यादा से ज्यादा हो इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh