सीतामढ़ी, जेएनएन। निजी विद्यालय संघ का कहना है कि स्कूलों को लेकर अब और सब्र नहीं होता। कोरोना काल में विद्यालय बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई के साथ उनका व्यवसाय भी चौपट हो गया है। संघ का कहना है कि कोरोना काल में मकान मालिक स्कूलों का विद्यालय बंद अवधि का किराया न लें तथा इस अवधि में सरकार भी संचालकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को राहत पैकेज दे। संघ के संचालकों की रविवार को डुमरा में बैठक हुई।

शिक्षक एवं कर्मचारी भुखमरी के कागार पर

ग्लोबल विद्यालय, अमघट्टा रोड, शंकर चौक,डुमरा में आयोजित बैठक की अध्यक्षता संघ के जिला संयोजक राजकिशोर प्रसाद ने की। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रखंडों के निजी विद्यालयों के संचालक इस बैठक में शरीक हुए। वक्ताओं ने संचालकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं पर अपने विचार दिए। कहा कि मार्च से अभी तक विद्यालयों के बंद रहने से संचालक, शिक्षक एवं कर्मचारी भुखमरी के कागार पर हैं। 90फीसद विद्यार्थियों की पढ़ाई पूर्णत: बाधित हैं। अत: संघ जिला प्रशासन से मांग करता है कि विद्यालयों को अविलंब और पूर्णतः खोलने का निर्देश दिया जाए।

आरटीइ राशि के भुगतान की मांग

निजी विद्यालयों को आरटीई मद के अंतर्गत सरकार द्वारा मिलने वाली सहयोग राशि का भुगतान भी किया जाए। यह राशि सत्र 2014 -15 से 2019-20 तक छः वर्षों का बकाया है। 2020 के मार्च से लेकर जब तक विद्यालय बंद रहते हैं तब तक का राहत पैकेज सभी संचालकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सरकार द्वारा दिया जाए। निजी विद्यालयों के मकान मालिकों को कोरोना काल में विद्यालय बंद अवधि का मकान किराया नहीं लेने का निर्देश भी जिला प्रशासन द्वारा दिया जाए। प्रस्वीकृत विद्यालय का एक प्रखंड से दूसरे प्रखंड में स्थान परिवर्तन होने पर उसकी प्रस्वीकृति को यथावत रखा जाए। जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि हमारी मांगों को अविलंब पूरा किया जाए अन्यथा हमें चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। 

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