मुजफ्फरपुर, जेएनएन। कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवोत्थान अथवा प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी शेष शय्या पर योगनिद्रा से जाग जाते हैं। इस बार यह 19 नवंबर, सोमवार को पड़ रहा है। आमतौर पर इस दिन से समस्त मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस बार ग्रह स्थिति के कारण ऐसा नहीं होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मांगलिक कार्य करने में गुरु के तारे का उदय होना विशेष माना जाता है। लेकिन इस बार देवोत्थान एकादशी के करीब एक सप्ताह पूर्व 13 नवंबर को गुरु का तारा अस्त हो चुका है।
इस कारण मांगलिक कार्य नहीं होंगे
15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा, जो 14 जनवरी तक रहेगा। 16 नवंबर, शुक्रवार से वृश्चिक राशि में सूर्य, बुध और गुरु का त्रिग्रही युति संबंध बन रहा है, जो 15 दिसंबर तक रहेगा। इस अवधि में मांगलिक कार्य करना उचित नहीं माना गया है। इन सब स्थितियों के कारण 17 जनवरी से श्रेष्ठ मुहूर्त शुरू होंगे। रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पं.रमेश मिश्र बताते हैं कि मांगलिक संस्कार के लिए आकाशमंडल में गुरु और शुक्र तारे का उदय होना जरूरी है। लड़की के लिए गुरु और लड़के के लिए शुक्र बलवान होने पर ही विवाह का शुभ मुहूर्त निकलता है। लेकिन इस समय गुरु का तारा अस्त है, जो लड़कियों के विवाह के लिए शुभकारी नहीं माना गया है।

 शास्त्रों में विवाहादि शुभ कार्यों के लिए दोषरहित शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है। अगले वर्ष 2019 में 17 जनवरी से ऐसे श्रेष्ठ मुहूर्त शुरू होंगे, जिनमें मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि इस बार देवप्रबोधिनी एकादशी को कोई विवाह नहीं होगा। विवाह के लिए युवक-युवतियों को ढाई माह का इंतजार करना होगा। जीरोमाइल के गुरुदेव नीरज बाबू बताते हैं कि जिन युवक-युवतियों का रिश्ता तय होने वाला है और वे विवाह करने की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें अभी विवाह के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि इस वर्ष बचे नवंबर और दिसंबर महीने के बाद 16 जनवरी तक एक भी श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं है। इसका कारण विवाह के लिए कारक माने जाने वाले गुरु तारा का अस्त होना है, जिसके चलते विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं होंगे।

 गुरु तारा उदित होने और खरमास खत्म होने के बाद 17 जनवरी 2019 से ही फेरे लिए जा सकेंगे। बताते चलें कि जुलाई में हरिशयनी एकादशी से शुभ कार्य बंद हो हैं। देखा जाए तो शुभ संस्कारों पर जुलाई से लगी रोक जनवरी माह में पडऩे वाली मकर संक्रांति तक जारी रहेगी। इस दौरान अग्रहण शुक्ल पंचमी तिथि, 12 दिसम्बर को श्रीराम-जानकी विवाह होगा।

केवल होगा तुलसी शालिग्राम विवाह

इस बार देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह होगा, लेकिन युवक-युवतियों के विवाह संस्कार नहीं किए जाएंगे। हालांकि महावीर पंचांग के मुताबिक, गुरु का उदय सात दिसंबर को होगा। इसके बाद दिसंबर में 8, 10, 11,12 व 15 तारीख को विवाह मुहूर्त होंगे। पंचांगकारों के मुताबिक, नये साल में विवाह के काफी लग्न हैं। 15 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त होते ही विवाहादि मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। 14 मार्च के बाद मीन का खरमास शुरू होते ही फिर इस पर विराम लगेगा। इसके बाद 15 अप्रैल से 11 जुलाई तक शहनाई बजेगी।

विभिन्न पंचांगों के अनुसार ये हैं विवाह मुहूर्त

जनवरी -17, 18, 22, 23, 25, 26, 28, 29, 30, 31

फरवरी - 01, 03, 08, 09, 10, 13, 14, 19, 20, 21, 22, 25, 26, 28

मार्च- 02, 03, 07, 08, 09, 12, 13, 14

अप्रैल- 15, 16, 18, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27

मई- 06, 07, 08, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 28, 29, 30

जून- 08, 09, 10, 11, 12, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 24, 25, 26, 28

जुलाई- 05, 06, 07, 08, 09, 10, 11

नवंबर- 19, 20, 21, 22, 23, 27, 28, 29, 30

दिसंबर- 01, 02, 05, 07, 11, 12 

Posted By: Ajit Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस