पश्चिम चंपारण, [सौरभ कुमार]। बगहा दो प्रखंड का प्राथमिक विद्यालय रोहुआ टोला। इसके आंगन में है सीता वाटिका। इसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभ भाई पटेल, पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का प्रतिनिधित्व करते फलदार तथा छायादार पेड़ लगे हैं।

 हर पेड़ का नाम किसी न किसी महापुरुष के नाम पर रखा गया है। पर्यावरण सुरक्षा के प्रति लोग संवेदनशील हों, इसे ध्यान में रखकर करीब 11 साल पहले प्रधान शिक्षक लखन प्रसाद ने इस वाटिका को विकसित किया। कक्षा तीन, चार और पांच में पर्यावरण मंत्रालय का गठन किया गया है। इससे जुड़़े छात्र इन पेड़ों की देखभाल करते हैं।

 विद्यालय की स्थापना वर्ष 2000 में हुई। इसे 40 डिसमिल जमीन भी उपलब्ध करा दी गई। वर्तमान प्रधान शिक्षक लखन प्रसाद ने वर्ष 2004 में शिक्षामित्र के रूप में यहां अध्यापन शुरू किया।

 वर्ष 2007 में वे प्रभारी प्रधान शिक्षक बने। चार्ज लेने के साथ ही विद्यालय का स्वरूप बदलने का संकल्प लिया। भवन निर्माण के दौरान जो राशि बची उससे करीब 30 पौधे लगाए। इसे सीता वाटिका का नाम दिया। पौधों को पानी देना उनकी दिनचर्या बन गई। धीरे-धीरे छात्र प्रेरित हुए और पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा ले लिया।

नेहरू से जुड़ा अशोक का पेड़ भी यहां

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 1964 में गंडक बराज के शिलान्यास के दौरान जब वाल्मीकिनगर आए तो अपने साथ अशोक का पौधा लाए थे। उसे यहां लगाया। पौधा बड़ा हुआ। प्रधान शिक्षक ने उसी पेड़ से निकले पौधे को लाकर विद्यालय में लगाया।

 अब यह पेड़ की शक्ल ले चुका है। इस पेड़ पर पतझड़ का कोई असर नहीं होता। सालोंभर पत्तियों से लदा रहता है। चूंकि माता सीता से अशोक पेड़ का जुड़ाव रहा है, इस वजह से विद्यालय की वाटिका सीता वाटिका कहलाती है।

 प्रधान शिक्षक लखन प्रसाद कहते हैं, पेड़ हमें प्राणवायु देते हैं। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। इनका महत्व महापुरुषों से कम नहीं, इसलिए उनके नाम पर पेड़ हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ बच्चों को स्वच्छता का पाठ भी पढ़ाया जाता है। शिक्षक नियमित रूप से मध्याह्न भोजन से पहले साबुन से बच्चों के हाथ धुलवाते हैं। विद्यालय विकास की राशि से वाटिका की देखरेख की जाती है।

 बगहा दो के बीईओ सुभाष बैठा कहते हैं, प्राथमिक विद्यालय रोहुआ टोला प्रखंड ही नहीं जिले में अपनी व्यवस्था के लिए पहचाना जाता है। पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम से विद्यालय की नैसर्गिक सुंदरता बढ़ी है।

 एसडीएम घनश्याम मीना ने कहा कि पेड़ों की सुरक्षा के साथ विद्यालय की व्यवस्था को आदर्श बनाए रखने वाले प्रधान शिक्षक वास्तव में प्रशंसा के पात्र हैं। मैं स्वयं विद्यालय जाकर व्यवस्था देखूंगा।

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