मुजफ्फरपुर, जेएनएन। बालिका गृह की चारदीवारी में वर्षों मासूमों की चीखें तैरती रहीं। उनपर जुल्म पर जुल्म होता रहा और मानवता दर्शक बनी रही। यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस  की रिपोर्ट के आधार पर मई 2018 में सामने आया था। लड़कियों को हर रात नशीली दवा देने और पिटाई की बात सामने आई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लड़कियों के बयान दर्ज करने के लिए बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल एंड न्यूरो साइंस के बाल मनोवैज्ञानिक व पेशेवर काउंसलरों की मदद ली गई थी। मामले में बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा ने 31 मई 2018 को महिला थाने में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने ब्रजेश ठाकुर सहित 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। बाद में अन्य की भी गिरफ्तारी हुई थी। सभी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

इनमें ब्रजेश ठाकुर, बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, तत्कालीन बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रहे दिलीप वर्मा, सदस्य विकास कुमार, बालिका गृह की कर्मचारी इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी, विक्की, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु शामिल हैं।

बालिका गृहकांड में कुछ लड़कियों की हत्या की बात भी सामने आई थी। इसपर पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के लिए 23 जुलाई 2018 को बालिका गृह परिसर की खोदाई कराई थी। वहां कुछ नहीं मिला था। उसी साल तीन अक्टूबर को सिकंदरपुर श्मशान घाट की खोदाई सीबीआइ ने कराई थी। वहां दो मानव कंकाल मिले थे। इसके बाद व्यापक स्तर पर इसकी वैज्ञानिक जांच आरंभ की गई थी। हालांकि, बाद में सीबीआइ ने कोर्ट में बताया था कि बालिका गृहकांड में किसी लड़की की हत्या नहीं हुई।  

Posted By: Ajit Kumar

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