मुजफ्फरपुर (जेएनएन)। शुभांगी इन्फ्रा प्रोजेक्ट के साथ पटियासा गांव के निकट एनएच-57 के किनारे हुए 57 एकड़ सहारा इंडिया की जमीन का एग्रीमेंट आशुतोष शाही के नाम से कराया गया था, लेकिन इसमें शहर की बड़ी हस्तियों के रुपये लगे थे। यह डील पूर्व मेयर समीर कुमार ने अपने साथी आशुतोष शाही के साथ मिल कर किया था। लगभग छह-सात साल से जमीन खरीद-बिक्री के कारोबार में पार्टनर रहे सुशील छापडिय़ा को अलग रखा गया। पुलिस के समक्ष स्वीकारोक्ति बयान में सुशील ने इसकी जानकारी दी है। आशुतोष उससे अलग हटकर दिल्ली व नैनीताल में जमीन व होटल का व्यवसाय करने लगा था। इससे सुशील खार खाए था।

जमीन के सौदे में हावी थी तिकड़ी

शहर के अंदर व बाहर स्थित कीमती जमीन के सौदे में समीर कुमार, सुशील छापडिय़ा व आशुतोष शाही की तिकड़ी हावी रहती थी। इस तिकड़ी के पीछे शहर की बड़ी हस्तियों की पूंजी लगी होती थी। पहली बार सहारा की जमीन के सौदे में सुशील छापडिय़ा को झटका लगा। उसे इस तिकड़ी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इससे वह तिलमिला उठा था, लेकिन समीर कुमार के आमने-सामने कुछ करने की स्थिति में नहीं था।

जमीन खरीदनेवाले का समीर पर रहता था विश्वास

साफ-सुथरी व राजनीतिक छवि के कारण समीर कुमार पर जमीन बेचने व खरीदने वाले का विश्वास था। वे उनके माध्यम से ही जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर रुपये लगाते थे। प्लॉटिंग कराई गई सहारा की जमीन के टुकड़े को खरीदने को लेकर बड़ी संख्या में खरीदारों ने सौदा किया था। इसके अलावा कई जमीनों के बदले रुपये इस सुशील व आशुतोष के माध्यम से लिया गया था, जबकि खरीदारों को जमीन रजिस्ट्री नहीं की गई है।

बयान की सत्यता की जांच कर रही पुलिस

सुशील के स्वीकारोक्ति बयान की सत्यता की पुलिस जांच कर रही है। सहारा व कल्याणी की जमीन के सौदे व इससे जुड़े लोगों के संबंध में जानकारी ली जा रही है। सुशील व श्यामनंदन मिश्र के संबंधों की जांच की जा रही है।

 

Posted By: Ajit Kumar