समस्तीपुर, जासं। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत शिक्षक के वेतन भुगतान में लापरवाही बरतने के मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण किया है। इसमें मध्य विद्यालय रहुआ के प्रखंड शिक्षक रामबाबू झा का वेतन निर्धारण और भुगतान से संबंधित मामले में शिकायत की गई थी। जिसके आधार पर सुनवाई के उपरांत आदेश के बाद भी वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा था। डीपीओ ने बीईओ को गलत आधार बनाकर भुगतान करने में लापरवाही बरतने और प्रधानाध्यापक को सोची समझी साजिश के तहत गलत रिपोर्ट देने और साजिश के तहत वेतन भुगतान में अभिरूचि नहीं लेने को लेकर पद का दुरुपयोग करने के मामले में जवाब तलब किया है। इसको लेकर शिक्षक ने दरभंगा प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक से पूरे मामले की शिकायत की गई थी। विदित हो कि शिक्षक ने पूर्व में डीपीओ से पूरे मामले की शिकायत की थी। इस पर विगत 14 सितंबर को सुनवाई हुई। जिसमें बीईओ, प्रधानाध्यापक और शिक्षक सम्मिलित हुए। सुनवाई के क्रम में तीनों ने अपना-अपना पक्ष रखा। डीपीओ ने बीईओ को प्रधानाध्यापक से साठ गांठ कर वेतन निर्धारण एवं वेतन भुगतान प्रारंभ करने के लिए रिश्वत मांगने के आरोप पर भी फटकार लगाई। डीपीओ ने तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण सौंपने का निर्देश दिया। इसमें स्पष्ट किया गया कि क्यों नहीं गलत आधार बनाकर शिक्षक का वेतन निर्धारण व भुगतान नहीं करने के आरोप में विधि सम्मत कार्रवाई प्रारंभ की जाए। तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने पर एक पक्षीय कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाएगी।

गलत व भ्रामक रिपोर्ट देने पर लगाई फटकार

बीईओ ने रिपोर्ट किया था कि राम बाबू झा का नियोजन वर्ष 2005 में प्रशिक्षित पंचायत शिक्षा मित्र के पद पर हुआ था। एक जुलाई 2006 से प्रशिक्षित कोटि का नियत वेतन प्राप्त कर चुके है जो बिल्कुल गलत है। डीपीओ ने बीईओ के इस तथ्य को भ्रामक व विभागीय नियम के प्रतिकूल बताया। स्पष्ट कि कि जब प्रशिक्षित के रूप में नियोजन हो चुका था तो फिर प्रशिक्षित का वेतन भुगतान करना किस नियम के तहत गलत है। पूर्व में बीईओ द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का आधा अधूरा जवाब दिया गया था।

मिलीभगत कर शिक्षक के वेतन को रखा गया अवरूद्ध

मध्य विद्यालय रहुआ के प्रधानाध्यापक एवं बीईओ द्वारा जानबूझ कर मूल सेवा पुस्तिका का बहाना बनाकर वेतन निर्धारण व अवरूद्ध रखा गया। जबकि बीईओ के समक्ष प्रधानाध्यापक के द्वारा मूल सेवा पुस्तिका अवलोकन हेतु उपस्थापित किया गया। ऐसे में सेवा पुस्तिका नहीं होने का बहाना बनाकर वेतन निर्धारण नहीं करना मिलीभगत को प्रमाणित करता है। किसी भी कर्मी का वेतन भुगतान संविधान के तहत जीने का अधिकार से संबंधित होता है। ऐसे में शिक्षक से कार्य भी लिया जा रहा है।

 

Edited By: Ajit Kumar