मुजफ्फरपुर [जेएनएन]। संघ प्रमुख डॉ. मोहन राव भागवत ने किसानों को खेती संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए पुरुषार्थ जगाने का मंत्र दिया। उन्होंने किसानों को आदर्श ग्राम बनाने के लिए मार्गदर्शन भी दिया। बुधवार को संघ प्रमुख भारती शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित चिंतन शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार तथा झारखंड के 110 किसानों से वे रूबरू हुए।

 भौगोलिक हिसाब से उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार व झारखंड के किसानों की खेती संबंधी समस्याओं में भिन्नता होने के बावजूद कुछ बातें सामान्य रहीं। मसलन सिंचाई की समस्या, कृषि उत्पादों के उचित मूल्य न मिलने की समस्या, विदेशी बीजों से खेती में आने वालीं तकनीकी समस्याएं।

सामूहिक प्रयास की जरूरत

सरसंघ चालक ने सिंचाई के लिए किसानों के सामूहिक प्रयास से नहर खोदे जाने की बात कही। उन्होंने मध्य प्रदेश के किसानों द्वारा सिंचाई संबंधी समस्याओं के निदान के लिए कि ए गए सामूहिक प्रयासों की भी चर्चा की। कहा, मध्य प्रदेश में किसानों के श्रमदान व भिक्षाटन की राशि से 30 किलोमीटर लंबी नहर तैयार कर ली गई। किसानों के पुरुषार्थ को देखकर बाद में सरकार सहायता के लिए आगे आई।

समस्याओं का खुद समाधान करें किसान

शिविर में इस बात पर मंथन किया गया कि किसानों को आगे बढ़कर अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करना चाहिए। इसके लिए गांवों में शाखाओं का विस्तार किया जाए। कहा, अधिक से अधिक किसानों को स्वयंसेवक बनाकर प्रतिदिन सुबह शाखा में एकत्रित करने का प्रबंध हो। उसी अवसर पर वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर प्रयास करें, सफलता निश्चित मिलेगी।

स्वदेशी प्रणाली पर जोर

संघ प्रमुख ने खेती की स्वदेशी प्रणाली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के उपयोग से खेत बंजर होने लगे हैं। लिहाजा, जैविक खाद अपनाना ही लाभकारी है। विदेशी बीज से खेती की जगह देसी बीज तैयार कराए जाएं। इस तरह पूरी कृषि प्रणाली ही देसी बनाई जाए। इसके लिए स्वयंसेवक किसानों को सक्रिय होना पड़ेगा।

उन्होंने ग्राम विकास का देसी मॉडल तैयार करने पर भी जोर दिया, ताकि खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ सके तथा किसानों को उनकी उपज का समुचित दाम मिल सके। इसके लिए उन्होंने गो संवद्र्धन पर भी जोर देने की बात कही।

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