मुजफ्फरपुर। बाइक चलाते समय हेलमेट को नजरअंदाज करना जिंदगी को मौत के करीब कर रहा है। सिर पर चोट लगने से जिंदगी खत्म हो रही है। यातायात नियमों की अनदेखी करना भी लोगों की जान का दुश्मन है। नाबालिगों की तेज रफ्तार हर किसी के लिए आफत बन चुकी है। आगे निकलने की होड़ में भी हादसे हो रहे हैं। एमवीआइ रंजीत कुमार ने कहा कि सुरक्षित यातायात के लिए परिवहन नियमों का पालन जरूरी है। नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए परिवहन विभाग लगातार अभियान चलाकर कानून तोड़ने वालों को जुर्माना कर रहा है। लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने आदि को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है।

नाबालिग वाहन चालकों की बेलगाम रफ्तार, ले रही जान : वाहन चलाने वालों में 14 वर्ष से कम उम्र के युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर से लेकर एसएच व एनएच पर इनकी बेलगाम रफ्तार से हादसे हो रहे हैं। इसमें ऐसे युवाओं की जान तो जा ही रही अन्य राहगीरों की भी मौत हो रही है। स्कूल, कॉलेज जाने वाले युवक अब बाइक व स्कूटी का उपयोग करने लगे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए परिवहन व पुलिस द्वारा अभिभावक पर सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यह अमलीजामा नहीं पहन सका।

नशे में ड्राइविंग, हो रहे हादसे, जा रही जान : शराबबंदी के बाद भी नशे की हालत में ड्राइविंग हो रही हैं। बस, ट्रक समेत बड़े वाहनों के चालकों के साथ ही पर्सनल वाहन का उपयोग करने वाले भी ड्राइविंग के समय नशे की हालत में होते हैं। इससे वाहन अनियंत्रित होकर हादसों के शिकार हो रहे हैं। जांच के नाम पर पर उगाही होने से इस पर लगाम नहीं लग पा रही है।

ऑटो का परमिट नहीं, ड्राइविंग लाइसेंस भी नदारद : अधिकतर ऑटो चालकों के पास व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हैं। यही नहीं अधिकतर के पास पूरे कागजात भी नहीं हैं। बिना कागजात के ये धड़ल्ले से ऑटो चला रहे हैं। किसी के पास परमिट नहीं है तो किसी का फिटनेस-प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं है। परिवहन विभाग की कार्रवाई सिफर है। कार्रवाई नहीं होने से ये बेखौफ हैं। विभाग संसाधन की कमी का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है।

12 से 14 वर्ष के बच्चे चला रहे ऑटो, हादसे की संभावना : 12 से 14 वर्ष के बच्चे भी ऑटो चला रहे हैं। इन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। इनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही अनुभव। विडंबना ये है कि स्थिति से अवगत होने के बाद भी परिवहन विभाग मौन है। इससे हादसों की संभावना बनी रहती है।

ओवरटेक हादसे की बड़ी वजह, यातायात नियम हो रहे नजरअंदाज : एनएच व एसएच पर होने वाले हादसों की एक बड़ी वजह ओवरटेक है। आगे निकले की होड़ में वाहन टकराते हैं, नतीजा हादसों में मौत हो रही है। लोग इतनी जल्दी में रहते हैं कि वे नियमों को नजरअंदाज करते हैं। इसी वजह से वे अगल-बगल या आमने-सामने से आ रहे वाहनों से भिड़ जाते हैं। सड़क पर ड्राइविंग के समय ओवरटेक न करें। गाड़ी ड्राइव करते समय रेस न लगाएं. यह जरूरी नहीं कि कोई आपसे आगे निकल गया, तो आप भी उससे आगे निकलें और यातायात के नियम को तोड़े। अगर आप यातायात के नियम का पालन करते हुए गाड़ी चलाते हैं तो यह आपके साथ साथ दूसरों के लिए भी अच्छा होगा।

हेलमेट को नजरअंदाज करना कर रहा मौत के करीब : बाइक चलाते समय हेलमेट को नजरअंदाज करना जिंदगी को मौत के करीब कर रहा है। हादसे में सिर पर चोट लगना जानलेवा होता है। इससे बचाव के लिए हेलमेट का प्रयोग जरूरी है। इसे पहनने से सिर का काफी हद तक बचाव होता है और मनुष्य ब्रेन-डेथ का शिकार होने से बच जाता है। मानव जीवन काफी अमूल्य है। परिवहन व पुलिस विभाग हेलमेट को लेकर लगातार अभियान चला रहा है, मगर लोग सुधरने का तैयार नहीं। हेलमेट लगाने को सख्ती से लागू करने के लिए जुर्माने की राशि भी काफी बढ़ाई गई। अभियान भी चलाए गए, मगर इसका असर लोगों पर नहीं हो रहा है।

परिवहन नियम तोड़ने पर जुर्माना

नाबालिग द्वारा वाहन चलाना : 5000 रुपये।

- बिना निबंधन वाहन : 5000-10000

- बिना फिटनेस वाहन : 5000-10000

- अनियंत्रित वाहन चलाने पर : 1000-2000

- खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर : 5000-10000

- शराब पीकर ड्राइविंग : 10000-15000

- मानसिक-शारीरिक रूप से अयोग्य द्वारा ड्राइविंग : 1000-2000

- दुर्घटना संबंधी अपराध : 5000-10000

- असुरक्षित वाहन का उपयोग : 1500

- सड़क सुरक्षा का उल्लंघन : 10000 जुर्माना व जेल।

- ध्वनि व वायु प्रदूषण : 1000

- ओवरलोडिंग मालवाहक : 20000 व प्रति टन 2000

- ओवरलोड पैसेंजर : 200 प्रति यात्री

- सीट बेल्ट का उल्लंघन : 1000

- हेलमेट का उल्लंघन : 1000

- बाइक पर तीन सवार : 1000

- बिना वैध प्राधिकार के वाहन को ले जाना : 5000

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