मुजफ्फरपुर। जिंदगी अनमोल है। इसे समझने की जरूरत है। सड़कों पर परिवहन नियमों का उल्लंघन व मनमानी से जिंदगी बर्बाद हो रही है। सड़क हादसों की एक बड़ी वजह असावधानी है। यातायात नियमों का पालन नहीं करना, आगे निकलने की होड़ व नशे में ड्राइविंग हादसों का कारण बनती है। ठंड के दिनों में कोहरे से इसकी संख्या बढ़ जाती है। डीटीओ रजनीश लाल ने कहा कि ओवरलोड व अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर जुर्माना किया जा रहा है। नशे की हालत में ड्राइविंग को लेकर भी अभियान चल रहे हैं। दोषी पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

ट्रक व ट्रैक्टर से बाहर निकली छड़े देतीं हादसों को दावत : छड़ (सरिया) लादकर चलने वाले ट्रक व ट्रैक्टर हादसों को दावत देते हैं। ये नियमों की अनदेखी कर चलते हैं। छड़ का एक बड़ा हिस्सा बाहर निकला होता है। यह जानलेवा होता है। कोहरे से इसके पीछे चल रहे वाहन अधिकतर इसे नहीं देख पाते और हादसे के शिकार हो जाते हैं। हादसे में ये छड़ शरीर के आर-पार भी हो जाती है। एनएच व एसएच पर ऐसे ट्रक-ट्रैक्टर खड़े कर छोड़ दिए जाते हैं, जिससे हादसे होते हैं।

जुगाड़ वाहनों पर रोक नहीं, कोर्ट का आदेश बेअसर : सर्वोच्च न्यायालय ने जुगाड़ गाड़ी का परिचालन बंद करने का आदेश सभी डीटीओ को दिया है। लेकिन, यह फाइल तक ही सिमट गया है। जिले में जुगाड़ वाहन बिना रोक-टोक चल रहे हैं। ये ओवरलोड होकर शहर की सड़कों पर चलते हैं। इससे भी हादसे होने की संभावना बनी रहती है। रोक के बदले इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।

अवैध पार्किंग जारी, बढ़ रही परेशानी : यातायात व्यवस्था बेजान हो चुकी है। दोपहिया से लेकर बड़े वाहन तक यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नतीजा आएदिन हादसे हो रहे हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में अवैध पार्किंग से पैदल चलना मुहाल है। वहीं एनएच व एसएच के किनारे खराब वाहन खडे़ कर देने से यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। नियमों का पालन नहीं होने से सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैं। शहर के अति व्यस्ततम व व्यापारिक बाजारों में वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं है। इससे मोतीझील, सरैयागंज, कंपनीबाग समेत कई प्रमुख बाजार में लोग सड़क पर ही वाहन खड़े करते हैं। इससे जाम की समस्या झेलनी पड़ती है।

खटारा व अनफिट वाहनों पर लगाम नहीं : जिले की सड़कों पर धड़ल्ले से खटारा वाहनों का परिचालन हो रहा है। जर्जर व खटारा वाहन ओवरलोड चलते हैं। ये लोगों के लिए जानलेवा होते हैं। इससे सफर जान जोखिम में डालना है। आएदिन ऐसे वाहन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। लोगों की जान जा रही है। विडंबना यह है कि ऐसे खटारा वाहन कागजों पर फिट होते हैं। इनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र होता है। इससे ये कार्रवाई से बच जाते हैं। जब हादसा होता है तो परिवहन विभाग जांच में जुट जाता है।

नशे में चालक-खलासी, यात्रियों की जान खतरे में : सड़क हादसे की एक बड़ी वजह नशे में ड्राइविंग है। अधिकतर चालक नशे में वाहन चलाते हैं। इससे वे अनियंत्रित होकर हादसों को दावत दे रहे हैं। चालकों के नशे में होने की जांच के लिए वर्षो पूर्व परिवहन विभाग को अल्कोहल टेस्टिंग मशीन दी गई थी। इससे चालक व खलासी की जांच करनी थी, लेकिन वह जंग खा रही है। इधर, नशे से जिंदगियां खत्म हो रही हैं। पुलिस भी इसको लेकर गंभीर नहीं है।

सड़कों का आधा-अधूरा निर्माण, हो रहे हादसे : सड़कों का आधा-अधूरा निर्माण भी हादसों की वजह बन रहा है। अधिकतर ऐसी सड़कों पर अंजान चालक संतुलन खो देते हैं। नतीजा हादसे होते हैं। एनएच, एसएच से लेकर कई प्रमुख सड़कों पर अधूरे निर्माण से परेशानी हो रही है। इन सड़कों पर बने गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं। मुजफ्फरपुर-पटना, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर-शिवहर समेत कई प्रमुख जिलों को जोड़ने वाली सड़कें अधूरे निर्माण से परेशानी की वजह बनी हैं। रात में ऐसी सड़कों पर हादसे की संभावना अधिक रहती है।

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