मुजफ्फरपुर : कोरोना संक्रमण के इस दौर में निजी स्कूलों के साथ कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। एक समस्या निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति को लेकर आ रही है। प्रस्वीकृति पत्र के अभाव में कई विद्यालयों की सीबीएसई से संबद्धता पर भी खतरा मंडराने लगा है। कई निजी विद्यालय सीबीएसई के मान्यता से वंचित रह सकते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एसोसिएशन ऑफ बिहार एकेडमिक इंस्टीट्यूशन का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान से मिला। अध्यक्ष व होली मिशन सीनियर सेकेंड्री स्कूल के निदेशक गणवंत कुमार मल्लिक ने पदाधिकारियों को बताया कि सत्र 2013-14 से सत्र 2019-20 की अवधि में 300 से अधिक निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति दी गई। लेकिन बिना किसी सूचना के उन विद्यालयों की प्रस्वीकृति फिर से रद कर दी गई। उन्होंने रद किए गए विद्यालयों की प्रस्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया है। उन्होंने दोनों पदाधिकारियों से इस मामले में अतिशीघ्र प्रस्वीकृति समिति की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष के अलावा महासचिव राजेश कुमार, सचिव क्रीड़ा प्रमोद कुमार एवं कोषाध्यक्ष चंदन कुमार शामिल थे।

सौ प्रधानाध्यापकों का वेतन रोका

हाईस्कूलों में स्मार्ट क्लास के उपस्कर नहीं खरीदने तथा नाइट गार्ड नहीं रखने वाले तकरीबन सौ प्रधानाध्यापकों के खिलाफ वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी अब्दुल सलाम अंसारी ने बताया कि स्मार्ट कक्षा चलाने के लिए सरकार की ओर से प्रति विद्यालय को 90 हजार रुपये दिए गए हैं। इससे टीवी आदि इलेक्ट्रॉनिक उपस्कर की खरीदारी करनी है। तीन दिनों के अंदर अगर इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की खरीदारी नहीं की गई तो निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021