मुजफ्फरपुर, जासं। कोरोना महामारी को लेकर बहाल मानव बल को हटाने के बाद अब मामला कोर्ट में है। 70 से अधिक मानव बल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सीएस से जवाब मांगा था। जानकारी के अनुसार हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा ने शनिवार को हाई कोर्ट को बहाली के सरकार के आदेश की कापी और पूरी प्रक्रिया से संबंधित कागजात के साथ रिपोर्ट भेजी है। बताया कि हाई कोर्ट ने जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी, उसे भेजी गई है। न्यायालय का जो आदेश आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

दूसरी लहर को लेकर हुई थी बहाली

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यकता के अनुसार आकलन कर तीन माह के लिए मानव बलों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। इस काम में आउटसोॄसग एजेंसी को प्रमुखता देनी थी। जानकारों की मानें तो बहाली के लिए डीएम की ओर से अनुमोदित एक प्रतिनिधि समेत तीन सदस्यीय कमेटी बनानी थी। तत्कालीन सिविल सर्जन ने अपने कार्यालय की दीवार पर बहाली से संबंधित एक हस्तलिखित सूचना चस्पा कराकर 780 लोगों की बहाली कर दी। उन्होंने डीएम को भी इसकी सूचना नहीं दी। इसके बाद जिला परिषद की बैठक में विधान पार्षद दिनेश सिंह ने मानव बलों की बहाली में धांधली होने का आरोप लगाते हुए डीएम से जांच कराने की मांग की थी। डीएम प्रणव कुमार ने डीडीसी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी।

30 हजार रुपये बहाली के नाम पर मांगे गए

कमेटी ने अभी जांच शुरू भी नहीं की थी कि इसी बीच सदर अस्पताल में कार्यरत डाटा इंट्री आपरेटर धर्मेंद्र कुमार का आडियो वायरल हो गया। इसमें एक आवेदक से 30 हजार रुपये बहाली के नाम पर मांगे गए थे। इस पर डीएम ने टीम को तुरंत जांच कर रिपोर्ट देेेने को कहा। जांच टीम ने सिविल सर्जन द्वारा प्रस्तुत किए गए कागजात में पाया कि मानव बलों की बहाली में काफी धांधली की गई है। वहीं सरकार के मानकों को भी पूरा नहीं किया गया है। जांच टीम की रिपोर्ट के बाद डीएम ने बहाली रद करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया। इस पर सिविल सर्जन ने बहाली रद कर दी। अगले दिन मानव बलों ने सड़क जाम कर हंगामा किया तो सिविल सर्जन ने अपने ही आदेश को वापस लेते हुए पुन:बहाल कर दिया। डीएम ने इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी। उसके बाद मानव बल को हटा दिया गया। काम से हटाए गए मानव बल का कहना है कि जब तीन माह के लिए बहाल किया गया तो पहले क्यों हटा दिया गया। अब न्यायालय इस मामले की सुनवाई कर रहा है।  

Edited By: Ajit Kumar