मुजफ्फरपुर। सिकंदरपुर स्थित एसएसपी के आवास पर वैसे तो सामान्य दिनों में भी कड़ी पहरेदारी रहती है। लेकिन सोमवार को पहरेदार व पहरेदारी बदली रही। जिनकी निगाहों से पहरेदार सहम उठते थे, आज उनकी पहरेदारी में खुद एसएसपी विवेक कुमार 'कैद' थे। वह अपने ही आवास में विशेष निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम का सामना कर रहे थे। इस छापेमारी से उनके आवास व कार्यालय का नजारा ही बदल गया।

समाहरणालय परिसर स्थित एसएसपी कार्यालय परिसर में सोमवार की देर रात बत्तियां जल तो रही थी, लेकिन परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था। अंदर पुलिस अधिकारी व बाबू लोग बैठे थे। ऐसा कहा जा रहा था कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्यालय को खोल कर रखने को कहा है। कुछ देर पहले निगरानी की टीम भी यहां पहुंची थी। इस टीम के जाने के बाद परिसर में एक भी पुलिस अधिकारी या जवान नहीं दिखा। अलबत्ता कुछ सरकारी गाड़ियां जरूर लगी हुई थीं। उधर, सिकंदरपुर स्थित एसएसपी आवासीय परिसर की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। चप्पे-चप्पे पर रोशनी से नहाए इस परिसर में कम ही बत्तियां जल रही थीं। बत्तियां निगरानी की टीम ने ही जलाई थी। एक पड़ोसी ने बताया कि परिसर की रोशनी से आसपास का क्षेत्र भी जगमग रहता था, लेकिन आज वह बात नहीं है।

'कौन हो' के सवाल से सन्नाटा भंग

: छापेमारी को लेकर आवास के अंदर भले ही हलचल चल हो लेकिन परिसर में गहरा सन्नाटा पसरा था। यह सन्नाटा तब टूटता जब आवास के मुख्यद्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी किसी को उस तरफ बढ़ते देख लगभग चीखने की अंदाज में 'कौन हो' कहकर उसे टोकते। परिसर में उन्हीं लोगों को अंदर जाने दिया जाता जो छापेमारी से संबंधित होते थे। आवास के मेनगेट के निकट मीडिया कर्मियों का हुजूम व निगरानी के अधिकारियों की रुक-रुक कर आवाजाही भी इस सन्नाटे को तोड़ रही थी। आसपास के मकान की खुली खिड़कियों से झांकती निगाहें सब कुछ जानने का प्रयास करती थी। रास्ते से गुजर रहे लोगों की निगाहें व चल रही जुबान एसएसपी व पुलिस विभाग की कारगुजारियों का तो जैसे सब बखान कर रही थीं।

Posted By: Jagran