मुजफ्फरपुर। पानापुर (कांटी) ओपी में तैनात दारोगा संजय कुमार गौड़ की खुदकशी के मामले में एसएसपी विवेक कुमार कठघरे में आए। इसके लिए महकमे में उनकी काफी किरकिरी हुई। दारोगा की पत्नी ने थानाध्यक्ष बनाने के लिए मोटी रकम लेने का आरोप लगाया था। हालांकि दूसरे दिन ही दारोगा की पत्नी अपने बयान से पलट गई। लेकिन मामला एसएसपी का पीछा नहीं छोड़ रहा है। वर्तमान में इस केस की जांच सीआइडी कर रही है। सीआइडी की जांच में एसएसपी भी घिर सकते हैं। हालांकि अधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि गत साल साथी दारोगा मो. हारुण के सरकारी रिवाल्वर से उनके कमरे में ही संजय ने अपने सिर में गोली मार ली थी। घटना से चंद मिनट पूर्व हारुण सरकारी पिस्टल अपने कमरे में बिछावन पर रखकर बाथरूम गए थे। इस बीच गोली की आवाज सुनने के बाद वे बाहर निकले। देखा कि संजय गोली से घायल हैं और उन्हें कांटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा है। लेकिन इलाज के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। संजय मूल रूप से सिवान जिले के दरौली के रहने वाले थे। 2009 में दारोगा में बहाल हुए थे। बताया गया कि वह काफी दिनों से तनाव में चल रहे थे। पुलिसकर्मियों की मानें तो संजय का पठन-पाठन बोकारो में हुआ था। मुजफ्फरपुर से पहले वह वैशाली जिला बल में थे। वहां पर वह शराब पीकर हंगामा करने के मामले में सुर्खियों में रहे थे। शराब मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वैशाली एसपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया था। इस बीच रेंज ट्रांसफर में वैशाली से बदलकर मुजफ्फरपुर आए थे।

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By Jagran