दरभंगा, जासं। जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार के आदेश पर विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित एवं कार्यरत शिक्षकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा हाल में जारी बर्खास्तगी के आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। शिक्षकों का कहना है कि डीईओ ने जिला प्राधिकार के आदेश के खिलाफ राज्य अपीलीय प्राधिकार में वाद दायर करने का जो आदेश दिया वह भी वैधानिक नहीं है। कई शिक्षकों को तो राज्य अपीलीय प्राधिकार का भी आदेश प्राप्त है। प्रावधान के मुताबिक जिला अपीलीय प्राधिकार के किसी भी निर्णय से असहमत होने पर कोई भी पक्ष राज्य प्राधिकार में जा सकता है, लेकिन उसके लिए मात्र तीस दिन की अवधि निर्धारित है। डीईओ के हालिया आदेश के पहले ही यह अवधि वर्षों पूर्व बीत गई। अब राज्य अपीलीय प्राधिकार किसी निर्णय के खिलाफ वाद कैसे स्वीकार करेगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों के नियोजन रद करने की अनुशंसा के समय इन तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह कि संबंधित नियोजन ईकाइयां उनकी अनुशंसा को अधिसूचित करने में आनाकानी कर रही है। कुछ विद्यालयों में ऐसे में शिक्षकों को भी प्राधिकार के आदेश से कार्यरत बताकर हटाने की अनुशंसा की गई है, जिन्हें किसी भी सक्षम प्राधिकार से नियोजन का आदेश प्राप्त नहीं है। लेकिन उनके नियोजन को रद करने की अनुशंसा करते समय उन्हें भी विरोध करने का नया हथकंडा थमा दिया है।

बहेड़ी प्रखंड के हावीडीह पंचायत के प्राथमिक विद्यालय अनुसूचित जाति टोल के शिक्षक सुरेन्द्र कुमार सुमन , पूजा मिश्रा , दीपेश कुमार और सोनू पंडित ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर उनसे 11 अप्रैल को जारी उनके आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि उनकी विद्यालय में उपस्थिति पर रोक लगाना जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार के आदेश की अवमानना है। उन्हें वाद संख्या 157/ 2019 में राज्य अपीलीय प्राधिकार का भी अनुमोदन प्राप्त है। बिना नियोजन इकाई से जानकारी लिए ही आदेश जारी किया गया है।

अपील दायर करने का यह है प्रावधान

सीडब्लूजेसी 12489/2018 दिलीप कुमार बनाम राज सरकार वाद में उच्च न्यायालय पटना ने 27 फरवरी 2019 को आदेश पारित किया, जिसे शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने 11 मार्च 2019 को अधिसूचित किया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि जिला अपीलीय प्राधिकार की कृत्य एवं शक्तियां न्यायिक अधिकार के तहत आती हैं। उसे अपने आदेश के क्रियान्वयन की शक्ति प्राप्त है। साथ ही यदि कोई पक्ष जिला अपीलीय प्राधिकार के आदेश से व्यथित हो तो आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर राज्य अपीलीय प्राधिकार के समक्ष उक्त नियमावली के नियम 14 के तहत अपील दायर कर सकता है।

 भैरोपट्टी के मामले में बीइओ ने मांगा मार्गदर्शन

बहादुरपुर की दिलावरपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय उर्दू भैरोपट्टी के एक दर्जन शिक्षकों का नियोजन रद करने की अनुशंसा जिला शिक्षा पदाधिकारी ने करते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को इसके क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा था। बीइओ छठू यादव ने 17 मई को डीईओ को इस संबंध में अपना प्रतिवेदन सौंपा है। उन्होंने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि एक दर्जन शिक्षकों में से मात्र आधे दर्जन शिक्षकों के संबंध में नियोजन का कोई भी आदेश उपलब्ध नहीं है। जिनमें निधि कुमारी , इमरान आलम , रमेंद्र कुमार , जय शंकर , नबीला खातून और सोनी कुमारी का नाम शामिल है।

जिप अध्यक्ष ने डीईओ के दावे की खोली पोल

जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी ने शिक्षकों के प्रतिनियोजन रद करने संबंधी डीईओ के दावे की पोल खोलते हुए हुए कुछ उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। घनश्यामपुर प्रखंड के लगमा उच्च विद्यालय के शारीरिक शिक्षक बैजू राय एक दशक से प्रखंड कार्यालय के स्थापना शाखा में प्रतिनियुक्त हैं। विद्यालय में शारीरिक शिक्षा की गतिविधियां ठप है। क्या डीईओ इस तरह के मामलों का संज्ञान लेना उचित नहीं समझती।

- पूर्व के अधिकारियों के स्तर पर ढील की गई है। उन्हें ही इस मामले में राज्य प्राधिकार में जाना था। वो नहीं गए। मैंने नियम संगत कार्रवाई की है। - विभा कुमारी जिला शिक्षा पदाधिकारी, दरभंगा।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh