मुजफ्फरपुर। डीजल व पेट्रोल के मूल्य में प्रतिदिन हो रही वृद्धि का असर आम लोगों की जिदंगी पर पड़ने लगा है। सवा चार माह में डीजल 4.52 व पेट्रोल के दाम में 3.12 रुपये की वृद्धि हुई है। इसका वजह से हरी सब्जी से लेकर जरूरत की सभी समान की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है। इससे घरों के बजट गड़बड़ा गए हैं। महंगाई की मार से आम उपभोक्ता परेशान हैं। इसकी भरपाई घर खर्च में 20 फीसद तक की कटौती कर करने में लगे हैं। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने 16 जून 2017 से प्रतिदिन डीजल व पेट्रोल के दामों की समीक्षा कर दर निर्धारण की नीति तय की थी। इसके बाद प्रतिदिन पांच से लेकर 70 पैसे तक मूल्य में उतार-चढ़ाव होता रहा है।

एक रुपये वृद्धि पर देश में हो जाता था हंगामा

समाजसेवी शाहिद कमाल कहते हैं कि तीन साल साल पूर्व जब डीजल-पेट्रोल के मूल्य में एक रुपये की वृद्धि होने पर देश में हंगामा हो जाता था। संसद से सड़क तक सरकार विरोधी आंदोलन शुरू हो जाते थे। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डीके दास का कहना है कि डीजल व पेट्रोल के दाम का सीधा असर मुद्रास्फीति पर पड़ता है। यही कारण है कि सरकार के सारे महंगाई नियंत्रण के प्रयास विफल हो जा रहे है। आवश्यक खाद्य वस्तुओं की महंगाई निरंतर बढ़ती जा रही है।

अब 50 रुपये के पेट्रोल में नहीं चलता काम

सिकंदरपुर निवासी अभिनय कुमार कहते हैं कि सौ रुपये में सवा लीटर पेट्रोल मिलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 69 रुपये से बढ़कर तेल 87. 15 रुपये प्रति लीटर हो गया है। शिक्षक रामकुमार का कहना है कि पहले 50 रुपये के पेट्रोल में एक से दो दिन घर से स्कूल आराम से आ जाते थे, लेकिन अब सौ रुपये का तेल लेना पड़ता है। अधिवक्ता सफदर अली ने कहा कि तेल की कीमत में वृद्धि का असर पेट्रोलियम पदार्थो पर भी हुआ है। मोबिल का दाम भी बढ़ गया है।

रसोई का बजट भी बढ़ा

जेल रोड निवासी शबनम खातून ने कहा कि गैस की कीमत भी प्रति माह बढ़ने लगी है। रसोई की बजट सवा साल पहले जो चार हजार थे वह अब छह हजार हो गए हैं। सिकंदरपुर की डॉली ने कहा कि ब्रांडेड कंपनी के आटा की कीमत में भी प्रति दस किलो 15-20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। दाल को छोड़कर रिफाइन, मसाला, घी आदि सभी के दाम में 10 से 20 फीसद की वृद्धि से घर का बजट गड़बड़ा गया है। साठ वाला चावल अब 68 रुपये किलो हो गया है। गृहणियों का कहना है कि रसोई की बजट में कमी की है। खाने की गुणवत्ता से समझौता करना पड़ रहा है। महंगाई की मार गरीबों को भी झेलनी पड़ रही है। उन्हें भी 22 रुपये किलो आटा व मसूर 60 रुपये किलो खरीदने पड़ रहे हैं।

ऑटो व बस भाड़े पर भी असर

मुजफ्फरपुर ऑटो रिक्शा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एआर अन्नू व महासचिव मो. इलियास इलू ने कहा कि डीजल की लगातार कीमत बढ़ने से ऑटो के रखरखाव का खर्च 25 फीसद बढ़ गया है। ऐसे में अब किराया बढ़ाना ही विकल्प बचा है। बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के जिला अध्यक्ष अध्यक्ष मुकेश शर्मा व प्रवक्ता कामेश्वर महतो ने कहा कि वृद्धि से बढ़े खर्चें का बोझ तो किराया बढ़ाकर ही पूरा करना पड़ेगा। तिथि डीजल पेट्रोल

01 जून 2018 74.13 84.02

01 जुलाई 72. 48 81.51

01 अगस्त 73.22 82.51

01 सितंबर 76.43 85.37 बॉक्स 2 :::

अनाज वर्ष 2016 2018

आटा 16 रुपये 22 रुपये प्रति किलो

चावल 40 रुपये 50 रुपये

दाल मसूर 50 रुपये 60 रुपये

तेल 90 रुपये 100 रुपये लीटर

दूध 30 रुपये 40 रुपये किलो

रिफाइंड 90 रुपये 100 रुपये लीटर

आलू 14 रुपये 20 रुपये किलो

परवल 15 रुपये 25 रुपये किलो

घी 400 रुपये 500 रुपये किलो

रसोई गैस नन सब्सिडी 600 916

Posted By: Jagran