मुजफ्फरपुर : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटर की परीक्षा एक फरवरी से शुरू हो रही है। विद्यार्थियों के पास महज दो सप्ताह से भी कम समय रह गया है। कोरोना के कारण स्कूल-कालेज बंद हो गए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में परेशानी नहीं हो इसके लिए दैनिक जागरण की ओर से विशेषज्ञों की सलाह अभियान शुरू किया गया है। इसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ विषय वस्तु की जानकारी, समय निर्धारण, लेखन शैली के साथ ही तनाव मुक्त होकर परीक्षा की तैयारी के टिप्स देंगे। इंटर के इतिहास विषय के विद्यार्थियों को टिप्स दे रहे हैं एलएस कालेज के इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डा.राजीव कुमार। वे बताते हैं कि 12वीं बोर्ड की परीक्षा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। छात्र के जीवन में क्योंकि यहां से आगे के भविष्य की रूप रेखा तय होती है। कला के छात्रों के बीच इतिहास शुरू से हीं लोकप्रिय एवं रोचक रहा है। कारण यह कि इसके माध्यम से वे समाज और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं से अवगत होते हैं। इतिहास में तिथि और घटना स्थल को लेकर छात्रों के बीच आशंका बनी रहती है परंतु इससे घबराने की जरूरत नहीं है। छात्रों को चाहिए कि घटनाओं को आम जनजीवन की घटनाओं से उसे जोड़कर याद रखें। बेहतर हो कि ऐतिहासिक घटनाक्रम को ध्यान रखें यह ज्यादा उपयोगी तरीका है। परीक्षा के दौरान घबराएं बिल्कुल नहीं बल्कि धैर्य के साथ प्रश्नों को हल करें। इसके लिए आवश्यक है कि पिछले वर्ष के प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें। परीक्षा के दौरान आसान प्रश्नों को पहले हल करें तथा कठिन प्रश्नों को हल करने के लिए उसे बार-बार पढ़े और उसी के अनुकूल उत्तर दें। शब्द सीमा का सदैव ख्याल रखें तथा टू द प्वाइंट उत्तर लिखें। ऐसा करके विद्यार्थी कम समय में बेहतर उत्तर लिख सकते हैं। बहु वैकल्पिक प्रश्नों की संख्या दोगुनी होती है। ऐसे में जिस प्रश्न के उत्तर को लेकर आश्वस्त हों वही उत्तर लिखें। ओएमआर शीट भरने में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है क्योंकि थोड़ी असावधानी उत्तर को गलत कर सकती है। तीन खंडों से इतिहास में आते हैं प्रश्न :

इस परीक्षा में भारतीय इतिहास के तीनों खंडों से पूछे जाते हैं। परीक्षार्थी एनसीईआरटी के तीनों खंडों का नियमित रिवीजन करें। बहु वैकल्पिक और लघु उत्तरीय प्रश्न तीनों खंडों से समान रूप से पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए इस बार वैदिक सभ्यता, महावीर जैन, बहमनी साम्राज्य, सूफी आंदोलन, दिल्ली सल्तनत, औरंगजेब, 1857 का विद्रोह तथा गांधीजी के नेतृत्व में चले तीनों आंदोलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। अब समय कम है। अत: नई चीजों को पढ़ने के बजाय पहले से पढे़ गए पुस्तकों और अपने नोट्स का बार-बार अध्ययन करें।

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रीडर कनेक्ट ::

इंटर के परीक्षार्थी को इतिहास में पाठ्यक्रम से जुड़े किसी सवाल को समझने में परेशानी हो तो अपने सवाल दैनिक जागरण के वाट्सएप नंबर 9304680892 पर भेजें। अगले अंक में विशेषज्ञ की राय के साथ उसे प्रकाशित किया जाएगा।

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परीक्षार्थियों के सवाल, विशेषज्ञ के उत्तर : दैनिक जागरण के परीक्षा की तैयारी अभियान के तहत प्रकाशित संस्कृत विषय के टिप्स पर विद्यार्थियों ने अपने सवाल वाट्सएप पर भेजे। विशेषज्ञ विद्या विहार हाई स्कूल के संस्कृत के शिक्षक आचार्य राजीव कुमार मिश्र ने उनके उत्तर दिए। प्र. लकार के कितने प्रकार से पाठ्यक्रम में सवाल पूछे जाते हैं। इसे कैसे पहचानेंगे।

उत्तर : संस्कृत में लकार 10 प्रकार के होते हैं। पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को इसके पांच प्रकार का अध्ययन करना होता है। लट, लोट, लिट, लंग और विधिलिग। वर्तमान काल के लिए लट लकार, लोट लकार आज्ञासूचक है। लंग लकार भूतकाल के लिए, विधिलिग लकार चाहिए अर्थ में और लृट लकार भविष्यत काल का सूचक है। सभी लकार के एक-एक शब्द रूप याद कर लें। इससे सभी लकार को आसानी से पहचान सकेंगे। प्र.संस्कृत में पत्र लेखन कठिन लगता है। इसे कैसे आसानी से लिखें।

उत्तर : इसके लिए संस्कृत व्याकरण का अध्ययन करना होगा। जैसे हिदी में पत्र लिखते हैं उसी प्रकार संस्कृत में व्याकरण पर पकड़ होने पर उसे अनुवादित कर आसानी से पत्र लिखा जा सकता है। इसमें विसर्ग और हलंत का विशेष ख्याल रखें। इन्होंने पूछे सवाल : ननटुन कुमार, सुप्रिया भारती।

Edited By: Jagran