मुजफ्फरपुर। बेला औद्योगिक क्षेत्र में जर्जर तारों के सहारे विद्युत आपूर्ति हो रही है। फेज एक और दो में जगह-जगह जर्जर तार लटका हुआ है। कई पोल टेढ़े होकर झुके हुए हैं। इससे हमेशा तार टूटने की आशंका बनी रहती है। तार टूटने पर उत्पादन पर भारी असर पड़ता है। चालक ट्रक लेकर क्षेत्र में जाने से डरते हैं। किस समय तार टूट जाए यह कहना मुश्किल है।

केंद्र की समेकित ऊर्जा विकास योजना से शहर और आसपास के इलाके में जर्जर पोल, तार व ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए तीन हजार करोड़ रुपये दिए गए। विद्या टेलीलिंक नामक एजेंसी इस कार्य को कर रही है। लेकिन कार्य की गति धीमी होने से औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक जर्जर तार बदलने की दिशा में प्रगति शून्य है। जबकि एजेंसी को कार्य मिले आठ माह से अधिक हो गए। हालांकि उक्त कंपनी द्वारा शहर और आसपास के इलाकों में काम चल रहा है।

दामोदरपुर में छह महीने से नहीं जोड़ा गया कनेक्शन

दामोदरपुर गंगाराम पोखर के समीप बांस-बल्ले के सहारे विद्युत आपूर्ति हो रही है। वहां वीटीएल के ठीकेदार ने पोल-तार लगाकर छह महीने से छोड़ दिया है। लोग बांस-बल्ली के सहारे बिजली जलाने को मजबूर हैं। इसके अलावा शहर में कई कॉलोनी व मोहल्लों में सिर के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का तार जानलेवा बन चुका है।

12 दिनों बाद भी नहीं बदला गया पोल

मिठनपुरा के कालीबाड़ी रोड में तीनपोखरिया के समीप 28 नवंबर को ट्रक के धक्के से कई विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए। पोल बदलने के लिए विद्युत अधिकारियों से लगातार गुहार लगाई जा रही है। लेकिन 12 दिनों के बाद अभी तक पोल नहीं बदला गया। इधर, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन के कार्यपालक अभियंता, प्रोजेक्ट विजय कुमार ने बताया कि एक साथ सारे जगहों पर कार्य करना संभव नहीं है। अभी शहर और सटे आसपास के मोहल्लों में जर्जर तार-पोल बदलने का कार्य चल रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में जगह-जगह झूल रहे विद्युत तारो को बदलकर कर केबल तार लगाया जाएगा।

Posted By: Jagran

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