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बालिका गृह यौन हिंसा : कांड संख्या अंकित किए बिना बालिका गृह की तीन लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम

सीबीआइ की टीम की जांच में बातें आईं सामने, जताई भारी आपत्ति। मृत्यु समीक्षा पत्र पर पुलिस ने दर्ज नहीं की अंकित कांड संख्या।

By Ajit KumarEdited By: Published: Fri, 28 Dec 2018 08:35 PM (IST)Updated: Fri, 28 Dec 2018 08:35 PM (IST)
बालिका गृह यौन हिंसा : कांड संख्या अंकित किए बिना बालिका गृह की तीन लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम
बालिका गृह यौन हिंसा : कांड संख्या अंकित किए बिना बालिका गृह की तीन लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। मृत्यु समीक्षा पत्र पर बिना कांड अंकित किए हुए ही बालिका गृह की तीन मृत लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम करा दिया। मृत्यु समीक्षा पत्र नगर थाना पुलिस के बदले अहियापुर थाना पुलिस ने तैयार किया था। शुक्रवार को तीनों लड़कियों के शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट खंगालने सीबीआइ एएसपी पीके झा के नेतृत्व में एसकेएमसीएच पहुंची तीन सदस्यीय टीम के सामने ये बातें आई हैं। टीम ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है।

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प्राचार्य और चिकित्सकों से लगभग तीन घंटे तक ली जानकारी

सीबीआइ टीम लगभग तीन घंटे तक प्राचार्य डॉ. विकास कुमार के प्रकोष्ठ में एफएमटी विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार, डॉ. बिजय कुमार प्रसाद एवं पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार से जानकारी ली। इसमें अधिकारियों ने मृत्यु समीक्षा पत्र पर कांड संख्या (एफआइआर नंबर) बगैर अंकित शव के पोस्टमार्टम को गलत करार दिया। डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से जिला पुलिस मृत्यु समीक्षा पत्र में बिना कांड संंख्या अंकित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती रही है।

 सिर्फ रेल पुलिस की ओर से जारी समीक्षा पत्र में कांड संख्या अंकित रहती है। बिना कांड संख्या दर्ज शवों के पोस्टमार्टम रोकने पर परिजन की ओर से तरह-तरह के आरोप लगने लगते हैं। इससे जल्द से जल्द पोस्टमार्टम करना उनकी मजबूरी हो जाती है। वहीं पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार से हिस्टोपैथोलॉजी जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई।

 टीम यह भी जानना चाह रही थी कि जांच की प्रक्रिया से लेकर स्लाइड को कितने दिन तक सुरक्षित रखने एवं इसे विनष्ट करने की प्रक्रिया क्या है। अंत में सीबीआइ की मांग पर एक बार फिर कंप्यूटर में दर्ज पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति विभागाध्यक्ष ने सौंपी।  


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