मुजफ्फरपुर : दीपावली जैसे-जैसे नजदीक आ रही है मूर्तिकार दिन-रात लगकर मूर्तियों को तैयार करने में जुट गए हैं। कहीं पीओपी की मूर्तियां तैयार हो रही हैं तो कहीं कुंभकार मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। पूर्व में चीन में बनीं लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी खूब बिकती थीं, लेकिन गलवन की घटना के बाद से इसमें कमी आई है। कोलकाता से भी पीओपी की मूर्तियां आ रही हैं। मिट्टंी महंगी होने से इस बार पीओपी और देसी गाय के गोबर व मिट्टी से बनीं मूर्तियां लोग की पसंद बनी हैं। दुकानदारों ने भी ऐसी मूर्तियों की बिक्री को तरजीह दे रहे हैं।

गौशाला रोड में मूर्ति निर्माण में जुटे रमेश पंडित बताते हैं कि मिट्टी की कीमत बढ़ने और मजदूर नहीं मिलने से पीओपी की मूर्तियां अधिक तैयार कर रहे हैं। बताया कि मिट्टी की मूर्ति की भी काफी डिमांड है, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। विभिन्न स्थल पर मूर्ति निर्माण में जुटे कलाकारों के अनुसार इस वर्ष करीब 20 हजार से अधिक पीओपी और दो हजार से अधिक मिट्टी निर्मित मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। वह बताते हैं कि पीओपी से निर्मित मूर्ति की कीमत 10 से 200 रुपये तक है। वहीं मिट्टी से निर्मित मूर्तियां 200 से 1000 रुपये तक की हैं। खबरा निवासी शंकर रमण बताते हैं कि इसबार देसी गाय के गोबर, मिट्टी, चूना आदि सामग्री की मदद से मूर्तियां तैयार करा रहे हैं। इसका प्रचार-प्रसार होने के बाद देशभर से इसके लिए डिमांड आने लगी है। 125 से 200 रुपये तक की ये मूर्तियां पूरी तरह स्वदेशी हैं। साथ ही इनपर प्राकृतिक रंग भी चढ़ा है। पिछली बार कुछ परिवारों ने इसे खरीदा था तो इसबार करीब 50 हजार मूर्ति निर्माण का लक्ष्य है।

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