मुजफ्फरपुर, जेएनएन। मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि सत्ता कविता को अपने अनुकूल ही पसंद करती है, चाहे व कैसी हो या किसी भी प्रकार की हो। यह सिलसिला आज का नहीं, बल्कि बहुत पुराना है। लेकिन ऐसा हरगिज होना नहीं चाहिए। हर कवि को यह समझना चाहिए कि कविता सत्ता का शाश्वत विपक्ष है। 'कोई दिवाना कहता है कोई पागल समझता हैÓ, ने हमें दुनियाभर में मशहूर कर दिया। हालांकि इससे पहले भी कई रचनाएं पसंद की गईं।

 जेपी आंदोलन से लेकर अब तक के राजनीतिक आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि उन आंदोलनों से कई राजनीतिक दल निकले, जिनका आज भी वजूद है। उन्होंने कहा कि किसी भी कवि की पहली जिम्मेदारी जनता के प्रति है, क्योंकि उसने ही उसे फर्श से अर्श तक पहुंचाया है। बातचीत में उन्होंने साहित्य और राजनीति के रिश्ते पर खुलकर चर्चा की। बिहारी, तुलसी से लेकर नागार्जुन तक का जिक्र करते हुए अपनी कविता सुनाई और कहा कि इसमें मुकम्मल जवाब मौजूद है।

बाजारवाद के कारण ही है कवियों की लोकप्रियता : तेजनारायण शर्मा

मध्यप्रदेश के रहने वाले हास्य-व्यंग्य के कवि तेज नारायण शर्मा ने बातचीत के दौरान कहा कि देश में होने वाले कवि सम्मेलन भारतीय संस्कृति की विरासत को आगे ले जा रहे हैं। कवि सम्मेलन भाषा का उत्सव है। कवियों की श्रेणी दो भाग में बंट गई है। एक, जिन्हें छपने-छपाने का शौक है। दूसरा, जो चुपचाप अपनी सृजनशीलता में लगा है। किसी भी कवि के लिए श्रोता सबसे बड़ी पूंजी हैं, जिस कवि को अच्छा सुनाना आता है, वही सही मायने में हीरो है। आज के दौर में बाजारवाद से सभी प्रभावित हैं। साहित्य भी इससे अछूता नहीं है। कवियों को लोकप्रियता भी इसी से मिलती है। हां, कवियों को अश्लीलता और फूहड़पन से बचने की जरूरत है।

सोशल मीडिया शब्द पहुंचा सकता है भाव नहीं : दिनेश बावरा

हास्य कवि दिनेश बावरा कहते हैं, हास्य कविताएं आज की जरूरत हैं। विकास के साथ तनाव की भी तरक्की हुई है, इसलिए हास्य रस का महत्व बढ़ गया है। कवि सम्मेलन तनाव दूर करने का सबसे बढिय़़ा उपाय है। सोशल मीडिया में कविताओं की चोरी पर दिनेश बावरा ने कहा कि सोशल मीडिया शब्द पहुंचा सकता है, भाव नहीं। लोगों को तो कई कवियों की कविताएं याद रहती हैं, फिर भी वे सिर्फ उनके मुंह से वहीं कविताएं सुनने आते हैं। यहीं भाव कवि सम्मेलनों की ताकत है।

कविता की संवेदनशीलता और उसके सरोकार में तरक्की : शबीना अदीब

शबीना अदीब ने इस आयोजन को मील का पत्थर करार दिया। कहा कि अखबार समूह के ऐसे कार्यक्रम से कविता-शायरी की संवेदनशीलता और उसके सरोकार में और तरक्की होगी। मशहूर शायरा शबीना अदीब को लगता है कि आज मुशायरों व कवि सम्मेलनों का दौर बदला है। यह गलियों-चौराहों पर आ गया है। शायरी के बल पर विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने वाली कानपुर की मशहूर शायरा शबीना अदीब का दर्द सिर्फ मुशायरों के गिरते स्तर पर ही नहीं दिखा, बल्कि नए कलाकारों के अंदाज को लेकर भी वह खफा दिखाई दी। उन्होंने कहा कि नए कलाकारों को अपनी तहजीब नहीं छोडऩी चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए यदि वह तहजीब के दायरे में काम करेंगे तो उन्हे आगे बढऩे से कोई नही रोक सकता।

बिहार के गौरव को वापस लाना है : शंभू शिखर

मैं हास्यकवि नहीं हूं, मैं राजनीति की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करता हूं तो लोगों को उसमें हंसी आती है, उक्त बातें जाने माने हास्यकवि शंभु शिखर ने दैनिक जागरण के साथ बातचीत में कही। शंभू शिखर ने 'हम धरती पुत्र बिहारी हैंÓ कविता लिखी है. इस कविता को वह कई जगहों पर गर्व से सुनाते हैं। शंभू शिखर बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। लंबे वक्त तक दिल्ली में रहे और कविता के प्रति अपनी रुचि को बचाए रखा। सब टीवी पर आने वाले शो वाह.. वाह में पहली बार उन्हें हिस्सा लेने का मौका मिला। साल 2005 में वह इस शो के जरिए पहली बार टीवी में दिखे। इसके बाद कई तरह के आयोजन में हिस्सा लेते रहे। शंभू शिखर के नाम कई तरह पुरस्कार हैं।

कविता हमेशा रहेगी : डॉ. सुरेश अवस्थी

हास्य-व्यंग्य के कवि डॉ. सुरेश अवस्थी ने कहा कि कविता हमेशा रहेगी, लेकिन शर्त है कि कविता जितनी अर्थवान हो उतनी ही संप्रेषणीय और सहज ग्राह्य भी। उन्होंने कहा कि कविता में ही देश की आत्मा बसती है। देश की सेवा और उसका सर्वांगीण विकास कविता के माध्यम से होती है। मूलरूप से कानपुर की रहने वाले डॉ. अवस्थी की रचना को दर्शको ने खुब सराहा। देश भक्ति भाव दर्शकों में भर कर देश प्रेम का भाव भर दिया।

छह महाकवियों का संगम

एक साथ छह महाकवियों का संगम। दैनिक जागरण की ओर से जिला स्कूल के मैदान में सजाई गई काव्य की महफिल में हास्य व व्यंग्य के रंग दिखे। यहां प्यार की कशिश थी तो ठहाके लगाने के लिए हास्य भी। हजारों श्रोताओं के बीच प्रसिद्ध उर्दू शायरा शबीना अदीब के इस काव्य सम्मेलन की राम स्मरण से शुरुआत की। इसके बाद शंभू शरण, दिनेश बावरा, तेज नारायण शर्मा ने समां बांधा। वहीं प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने हजारों श्रोताओं को बांधे रखा।

 इससे पहले कार्यक्रम का उद्धघाटन सांसद अजय निषाद, विधायक बेबी कुमारी, डीएम आलोक रंजन घोष, एससपी मनोज कुमार, एसडीओ पूर्वी डॉ. कुंदन कुमार, रेडक्रॉस के प्रदेश उपाध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह, लंगट सिंह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ओपी राय, दैनिक जागरण के महाप्रबंधक एनके मिश्रा, संपादकीय प्रभारी देवेंद्र नाथ राय ने संयुक्त रूप से किया।

 सांसद अजय निषाद ने कहा कि जागरण का यह कार्यक्रम तनाव को कम करता है। उन्होंने शायरी से ही अपने संबोधन की शुरुआत की। कहा, 'होठों से हंसी देखी ली, दिल के अंदर नहीं देखा। यारों ने मेरे गम का समंदर नहीं देखा।Ó साथ ही श्रोताओं से अपील की गम को भूलें, हंसी को अपनाएं। कार्यक्रम में प्रसार प्रबंधक मनीष कुमार, लेखा प्रबंधक रामानंद मिश्रा, विज्ञापन प्रबंधक अजय पांडेय समेत जागरण परिवार के सदस्य मौजूद थे। 

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Posted By: Ajit Kumar

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