पीएम विश्वकर्मा योजना ने मुजफ्फरपुर के शिल्पकारों के सपनों को दी उड़ान, खत्म हुई भारी ब्याज की मजबूरी
Bihar PM Vishwakarma Success Story: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने मुजफ्फरपुर के शिल्पकारों को महाजनों के भारी ब्याज से मुक्ति दिलाकर ...और पढ़ें

कांटी प्रखंड के शाहपुर निवासी प्रहलाद पंडित अब दूसरे को रोजगार देने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। PM Vishwakarma Yojana Muzaffarpur: कभी कारोबार बढ़ाने के लिए महाजन की चौखट पर चक्कर लगाने पड़ते थे। एक लाख रुपये के कर्ज पर हर महीने 10 हजार रुपये तक भारी ब्याज चुकाना मजबूरी थी।
सीमित पूंजी की वजह से पारंपरिक शिल्पकार न तो काम का विस्तार कर पाते थे और न ही परिवार का गुजारा सही से हो पाता था। लेकिन केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना' ने मुजफ्फरपुर के शिल्पकारों की जिंदगी और कारोबार को एक नई दिशा दे दी है।
पांच फीसदी ब्याज पर ऋण
कांटी प्रखंड के शाहपुर निवासी प्रहलाद पंडित को वर्ष 2024 में योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण मिला। महज पांच प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर मिली इस राशि से उन्होंने न केवल अपने मिट्टी के बर्तन और शिल्प के काम को बढ़ाया, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने लायक बन गए।
प्रहलाद बताते हैं, 'पहले पाई-पाई लेल मोहताज रहली, आब चार अदमी के रोजगार दे रहल छी।'
भारी ब्याज से मिली मुक्ति
प्रहलाद बताते हैं कि लगन, दीपावली और छठ जैसे मुख्य त्योहारों पर मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ जाती थी। तब पूंजी जुटाने के लिए महाजन से कर्ज लेना पड़ता था, जिस पर महीने का 10 हजार रुपये ब्याज देना पड़ता था।
अब योजना के तहत पूरे साल का ब्याज सिर्फ पांच हजार रुपये के आसपास बैठता है। इससे परिवार पर पड़ने वाला भारी आर्थिक दबाव हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
5 से 30 हजार हुई कमाई
पहले वे सिर्फ खपड़ा, कलश, दीया और कुल्हड़ जैसे पारंपरिक सामान बनाते थे, जिससे महीने में 5-6 हजार रुपये ही बच पाते थे। ऋण और सरकारी प्रशिक्षण मिलने के बाद अब वे मेमेंटो, टी-सेट, अगरबत्ती स्टैंड, जग और मग जैसे आधुनिक उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
इससे उनकी मासिक आमदनी बढ़कर 25 से 30 हजार रुपये हो गई है। साथ ही चार कारीगरों को 300 से 400 रुपये रोजाना की दर से रोजगार भी दे रहे हैं।
रिंच निर्माण से बढ़ी ओंकार की आय
शाहपुर के ही ओंकार कुमार भी इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। पांच वर्षों से आरओ फिल्टर मरम्मत का काम कर रहे ओंकार ने एक लाख रुपये का लोन मिलने के बाद रिंच निर्माण की छोटी इकाई शुरू की।
पहले जहां उनकी दैनिक कमाई 400 से 500 रुपये थी, वहीं अब रोजाना 700 से 1000 रुपये तक हो रही है। मांग बढ़ने पर वे अन्य कारीगरों को भी अपने साथ जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
हजारों शिल्पकारों को सीधा लाभ
मुजफ्फरपुर जिले में योजना के तहत अब तक 59,178 कारीगरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 9,362 शिल्पकारों का सत्यापन हो चुका है और 1,430 लाभार्थियों के बैंक खातों में ऋण की राशि सीधे भेजी जा चुकी है।
एमएसएमई के सहायक निदेशक अतुल कुमार मिश्रा के अनुसार, इस योजना से जिले की पारंपरिक हस्तकला को संजीवनी मिली है और कारीगर तेजी से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
