पश्चिम चंपारण [प्रभात मिश्र] । सुबह होते ही पेयजल की चिंता। भिखनाठोरी के हर घर का एक सदस्य पेयजल के लिए दो किलोमीटर की दूरी तय कर नेपाल जाता है। पेयजल के लिए आने-जाने में दो घंटे का समय जाया होता है। कई सालों से ग्रामीण इस संकट को झेल रहे, इसके बावजूद स्थायी निदान के लिए प्रयास नहीं हुआ। 

 भारत-नेपाल सीमा पर बसे गौनाहा प्रखंड की धमौरा पंचायत के भिखनाठोरी की आबादी तकरीबन 800 है। पहाड़ी क्षेत्र होने से यहां पेयजल बड़ी चुनौती है। साधारण हैंडपंप काम नहीं करते। गांव के बगल में ही पंडई नदी बहती है। दैनिक कार्यों के लिए लोग इसका पानी उपयोग करते हैं।

दो किलोमीटर सफर के बाद मिलता पानी

भोजन व पीने के लिए पानी लाने दो किलोमीटर दूर नेपाल के ठोरी गांव जाते हैं। वहां अमृतधारा नामक पहाड़ी से बहने वाले पानी को भरकर लाते हैं।  वर्ष 2016 में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचईडी) ने पेयजल आपूर्ति के लिए तकरीबन 18 लाख खर्च कर दो सोलर पंप लगाए। 2017 की बाढ़ में एक बेकार हो गया। दूसरे में हमेशा कुछ न कुछ गड़बड़ी रहती है। ग्रामीण पुन्ना सिंह और मोती पासवान का कहना है कि विभाग ने टैंकर से पानी आपूर्ति की व्यवस्था की, मगर संवेदक को समय से भुगतान नहीं होने से वह भी ठप है। 

यहां के ग्रामीण जंगल से लाते पानी

धमौरा पंचायत का एक और गांव है भतूजला। एक हजार की आबादी वाले इस गांव में भी पेयजल की समस्या विकराल है। यहां के ग्रामीण भी करीब दो किलोमीटर दूर वाल्मीकि रिजर्व टाइगर के जंगल से होकर बहने वाली भंवरी नदी का पानी लाकर प्यास बुझाते हैं। यहां भी विभाग ने करीब 16 लाख खर्च कर सोलर पंप लगाया। इससे कीचडऩुमा और गंदा पानी आता है। 

  मुखिया राम बिहारी महतो का कहना है कि हर घर नल का जल योजना के तहत भिखनाठोरी में एक साल पहले काम शुरू हुआ। पाइपलाइन बिछा दी गई है। टंकी भी लग गई है। जल्द पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। भतूजला में इस योजना पर कार्य नहीं हुआ है। 

 सहायक अभियंता, पीएचईडी बालमुकुंद कुमार का कहना है कि बंद सोलर पंपों को जल्द चालू किया जाएगा। कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थल जांच कर अवगत कराएं। वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी हरिमोहन कुमार कहते हैं कि जल्द समस्या का समाधान होगा। 

Posted By: Murari Kumar

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस