पूर्वी चंपारण, जेएनएन। कोरोना का भय लोगों के दिल में इस कदर बैठ गया है कि वे पूजा-पाठ में इसका हल तलाशने लगे हैं। भले ही बिना धार्मिक महत्व वाला सागवान का पेड़ ही क्यों न हो। रविवार की सुबह पूर्वी चंपारण के रक्सौल में यही देखने को मिला। यहां लोगों को सूचना मिली कि सागवान के एक पेड़ से पानी का रिसाव हो रहा है। बस क्या था, लोग इसे दैवीय चमत्कार मानकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। 

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 पर्यावरणविद इसे चमकत्कार जैसा कुछ नहीं मानते। पर्यावरणविद डॉ.अनिल सिन्हा और प्रो.किरण बाल ने बताया कि पेड़ से पानी निकलना असंभव है। पेड़ के छाल और पत्ती से प्रचंड धूप में पानी निकल रहा। ये लेनटेकिन की प्रक्रिया है। जिसके माध्यम से पेड़-पौधे पानी लेते है। अधिक होने पर वाष्प बनकर निकल जाते है। दूसरा, पेड़ के अंदर टिशू होने से पानी पत्ती तक नही पहुंचता जिससे पर्याप्त नमी नहीं मिलती है। हल्का फुल्का पेड़ के जड़ के पास कभी-कभी नमी दिखाई देता है। सागवान और शिसम के पेड़ ऑयली कनेन्ट होता है। उसे कुछ तरल पदार्थ निकलता है। 

लोग मान बैठे दैवीय चमत्कार

रक्सौल आईसीपी जाने वाली सड़क के समीप स्थित एयर पोर्ट रोेड के पास पेड़ से लगातार पानी की बूंदे टपक रही थी।  इस वाकये से लोग हैरान थे, पेड़ के आसपास लोगों की भीड़ लगने लगी। लोग इस पेड़ के पास इकट्ठा होकर इसे दैवीय चमत्कार कह रहे थे। इस बारे में ब्लॉक रोड निवासी शंभु प्रसाद, समाज सेवी जीतन प्रसाद उर्फ जितेंद्र साह, पप्पू केसरिवाल ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह और शाम ऊक्त क्षेत्र में टहलने जाते है। रविवार को आचनक पेड़ के आसपास पानी देखा। उसके पास गए तो पत्ते से पानी टपक रहा था। पंडित मनोरंजन तिवारी ने बताया कि यह घटना मन में कौतूहल पैदा करता है। इसका दैविक कारण हो या वैज्ञानिक यह अनुसंधान का विषय है। स्थानीय लोग पेड़ के आसपास पूजा-अर्चना शुरू कर दी। आसपास के दूसरे गांव से भी लोग यहां पहुंचने लगे। इसे दैवीय चमत्कार समझ पूरे दिन पूजा पाठ करते नजर आए।

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