पश्चिम चंपारण [सतेंद्र तिवारी] । ये नट न तो साधन संपन्न हैं और न ही शिक्षित। फिर भी कोरोना से जंग में इनका संकल्प प्रेरणादायक है। ऐसे लोगों के लिए सबक भी जो लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे।  नरकटियागंज प्रखंड मुख्यालय से 17 किमी दूर सेमरी पंचायत में बसे ये नट महामारी के इस दौर में प्रधानमंत्री का संकल्प टूटने नहीं देना चाहते। 

यहां के वार्ड संख्या आठ में नटों के 80 घर हैं। तकरीबन 400 नट रहते हैं। सामान्य दिनों में खेल-तमाशा दिखाकर जीविका चलाते हैं। इस परंपरागत पेशे के अलावा कोई दूसरा साधन इनके पास नहीं है। फिर भी ये लोग लॉकडाउन का सख्ती से पालन कर रहे। 25 मार्च से इस बस्ती में सन्नाटा पसरा है। इनके बच्चे भी घर से बाहर नहीं निकल रहे। 

बस्ती के हदीश नट ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते हुए घरों में बंद हैं। हालांकि, यह वक्त काफी कष्टदायक है। रोज कमाने एवं खाने वाले हैं। कुछ राशन बचाकर रखा था, उससे चूल्हा जल रहा था। अभी कुछ लोग मदद कर रहे। झगरहिया नट ने बताया कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही घर से निकलेंगे। पचकौड़ी नट व साहेब नट ने बताया कि एक सप्ताह पहले साठी के थानाध्यक्ष आए थे। उनके प्रयास से राशन की व्यवस्था हुई। अब तो कई अन्य लोग भी राशन दे गए हैं। हमें कोरोना को हराना है। 

फिजिकल डिस्टेंसिंग का भी कर रहे पालन : साठी के थानाध्यक्ष राजू मिश्र का कहना है कि चौकीदार के माध्यम से जानकारी मिली कि नट परिवार घरों में कैद हैं। राशन की किल्लत के बाद भी ये लोग लॉकडाउन तोडऩे को तैयार नहीं। इसके बाद सभी परिवारों के लिए राशन की व्यवस्था कराई गई। शोएब कमाल और ङ्क्षप्रसिपल अबू बकर ने भी मदद की है। नरकटियागंज के बीडीओ राघवेंद्र त्रिपाठी की धर्मपत्नी सुप्रिया त्रिपाठी ने बताया कि भोजन की ङ्क्षचता छोड़ इन लोगों ने खुद को अपने घरों में बंद कर लिया है। फिजिकल डिस्टेंसिंग का भी पालन कर रहे। जब इनकी बस्ती में खाद्य सामग्री लेकर पहुंचीं तो बुलाने पर भी सभी एक जगह इकठ्ठा नहीं हुए। घर-घर जाकर खाद्य सामग्री का वितरण किया।

Posted By: Rajesh Thakur

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस