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पापमोचिनी एकादशी 2026 कब है? जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा का महत्व

By Sr. Ajit Kumar Edited By: Ajit kumar
Published: Thu, 12 Mar 2026 01:05 PM (IST)

Papmochini Ekadashi 2026:इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अनजाने में किए गए पाप नष्ट ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई टूल चैटजीपीटी की मदद से तैयार की गई है।

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डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में पापमोचिनी एकादशी (Papmochini Ekadashi) को अत्यंत पुण्यदायी और पापों से मुक्ति दिलाने वाली तिथि माना जाता है।

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, ‘पाप’ और ‘मोचिनी’ यानी पापों से मुक्त करने वाली। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के अनजाने में किए गए पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक चतुर्वेदी ने बताया कि यह एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है। शास्त्रों में इसे विशेष महत्व दिया गया है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और आध्यात्मिक शुद्धि की कामना करते हैं।

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पापमोचिनी एकादशी 2026: तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च यानी रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है।15 मार्च 2026 को उदया तिथी है। अतः गृहस्थों व वैष्णवों यानी सभी के लिए 15 मार्च को ही एकादशी होगी। अगले दिन यानी 16 मार्च को सूर्योदय उपरांत 06:15 के बाद गोघृत यानी गाय के घी द्वारा पारण किया जाएगा।

महर्षि मेधावी और अप्सरा मंजूघोषा की कथा

पापमोचिनी एकादशी से जुड़ी कथा भविष्योत्तर पुराण में वर्णित है। कथा के अनुसार, च्यवन ऋषि के पुत्र महर्षि मेधावी चैत्ररथ वन में कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या से इंद्रदेव चिंतित हो गए और उन्होंने अप्सरा मंजूघोषा को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

अप्सरा के सौंदर्य और मोह में पड़कर मेधावी ऋषि कई वर्षों तक अपनी तपस्या भूल बैठे। बाद में जब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ तो उन्होंने क्रोधित होकर मंजुघोषा को पिशाचनी बनने का श्राप दे दिया।

अप्सरा ने क्षमा याचना की, तब महर्षि ने उसे पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने की विधि बताई। मंजूघोषा ने श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत किया, जिससे वह पापमुक्त होकर पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आई। कहा जाता है कि महर्षि मेधावी ने भी अपने दोषों से मुक्ति पाने के लिए यह व्रत किया था।

पापमोचिनी एकादशी की पूजा विधि

पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु निम्नलिखित विधि से पूजा करते हैं।

1. संकल्प लें :सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

2. वेदी स्थापना :भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें।

3. पूजा सामग्री अर्पित करें : भगवान को पीले फूल, फल, तुलसी दल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।

4. मंत्र जाप और कथा पाठ :पापमोचिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

5. आरती करें : पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।

6. फलाहार का नियम: इस दिन अन्न का त्याग करना ही श्रेष्ठ है। जिनके लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं है वे भक्त शाम के समय फल या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

व्रत पारण का महत्व

एकादशी व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण द्वादशी तिथि में किया जाए। वर्ष 2026 में व्रत का पारण 16 मार्च की सुबह सूर्योदय के बाद 06:15 बजे के बाद किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि पारण से पहले ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देना और भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी होता है। ऐसा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।