पश्चिम चंपारण, जेएनएन। रामनगर प्रखंड का एक ऐसा गांव जहां का हर युवा सेना में शामिल होकर देश सेवा करने का सपना देखता है। प्रखंड के वनवर्ती मनचंगवा गांव के युवा प्रतिदिन कठिन अभ्यास करते हैं। इस गांव के दो दर्जन से अधिक युवा सेना में नौकरी कर रहे हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल इस गांव के अभिभावक भी बच्चों की हर जरूरत को पूरा करते हैं ताकि वे अपने सपने को पूरा कर सके।

 गांव के धनंजय काजी एसएसबी, धर्मेंद्र महतो आर्मी, वीरेंद्र महतो एसएसबी, उपेंद्र काजी बीएसएफ, रंजीत कुमार बीएसएफ, रंजीत कुमार एसएसबी, जितेंद्र काजी एसएसबी, कमलेश कुमार एसएसबी, नागेश्वर पटवारी क्लर्क समेत दर्जनों अन्य देश की सीमा पर तैनात है। गांव के युवाओं में यह जज्बा इन्हीं सैनिकों ने भरा है। सपना पूरा हो, इसके लिए युवक दिनरात एक कर अभ्यास में जुटे रहते हैं। सुबह और संध्या पहर जब प्रैक्टिस के समय आमना-सामना होता है तो एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मच जाती है। छुट्टियों में घर आने वाले सैनिक इन्हें प्रशिक्षित करते हैं। 

हमें देश सेवा ही करनी है

अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल इस गांव के युवा किसी भी सेक्टर में नौकरी के लिए प्रयास कर सकते हैं। लेकिन इनका बस एक ही सपना है कि सेना में जाए और देश की सेवा करें। अभ्यास में जुटे सुजीत कुमार, उपेंद्र महतो, छोटेलाल महतो, रितु कुमार आदि का कहना है कि देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। उल्लेखनीय है कि मनचंगवा गांव की आबादी करीब 800 है। सेना और बिहार पुलिस में नौकरी करने वाले युवाओं के अभिभावक किसान मजदूर हैं।

मनचंगवा गांव के सरपंच ब्रजकिशोर साह ने बताया कि गांव का बच्चा बच्चा देश सेवा का सपना देखता है। अपनी मेहनत के दम पर कई युवाओं ने मंजिल हासिल की है। आशा है यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।

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Posted By: Ajit Kumar

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