मुजफ्फरपुर, जेएनएन। यूं तो एईएस का कहर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन इससे प्रभावित बच्चों के मामले में पूर्ण सजगता की स्थिति नहीं दिख रही। जिले के कुछ हिस्सों से अनदेखी की सूचना मिल रही है तो कुछ जगहों पर इनका नियमित परीक्षण किया जा रहा। 

बंदरा प्रखंड की बडग़ाव पंचायत के वगाही निवासी वीरेंद्र मांझी की पुत्री माला कुमारी को स्वस्थ होने के बाद 25 जून को एसकेएमसीएच से छुट्टी दे दी गई। पीडि़ता की मां इंदिरा देवी ने बताया कि राशन कार्ड, इंदिरा आवास समेत सभी सरकारी लाभ मिल रहे हैं। लेकिन, इलाज से पहले स्थानीय आशा का सहयोग नहीं मिला। निजी वाहन से एसकेएमसीएच गई, लेकिन भाड़ा नहीं मिला। अस्पताल से आने के समय दवा भी नहीं दी गई। पुर्जा पर दवा लिखकर बाहर से लेने के लिए कहा गया। आने के बाद कोई स्वास्थ्य कर्मी पूछने तक नहीं आया है।

 ऐसी ही स्थिति कांटी में देखने को मिली। प्रखंड में एईएस को हरा कर लौटे बच्चों की नियमित जांच नहींं हो पा रही है। पानापुर हवेली की छह वर्षीय संध्या की मां मीना देवी ने बताया कि इलाज के बाद संध्या ठीक है, लेकिन कमजोर हो गई है। उसे कोई भी सरकारी कर्मी देखने नहीं आया है।

 हालांकि साहेबगंज प्रखंड की स्थिति थोड़ी सुखद है। यहां के सात बच्चे एईएस प्रभावित के रूप में चिह्नित हुए थे। इशा छपरा निवासी भगवान पंडित की सात वर्षीय पुत्री रुबी कुमारी की उपचार के क्रम में एसकेएमसीएच में मौत हो गई थी। शेष छह बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट आए हैं। पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जीके गौतम द्वारा इन बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई है। आशा से संबंधित बच्चों की रिपोर्ट प्रतिदिन ली जा रही है। बीडीओ अरविंद कुमार सिंह ने भी संबंधित बच्चों के गांवों में जाकर निरीक्षण किया।

  स्वस्थ होने के बाद प्रतापपट्टी निवासी संजय राम का चार वर्षीय पुत्र अंशु कुमार चिकन पॉक्स का शिकार हो गया। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर आए थे। इलाज किया तो अब बच्चा ठीक है। आशापट्टी निवासी विजय साह की तीन वर्षीय पुत्री सुप्रिया कुमारी उपचार के बाद घर लौटकर स्वस्थ है। माधोपुर हजारी के संतोष कुमार पासवान का पुत्र शिवशंकर कुमार भी ठीक है।  

Posted By: Ajit Kumar

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