सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन पर छिड़ी चर्चा, मुजफ्फरपुर के लोगों ने खुलकर रखी अपनी राय
Bihar Politics: नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद मुजफ्फरपुर में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग उनके दो ...और पढ़ें

गृहमंत्री अमित शाह के पटना पहुंचने पर उनका स्वागत करते सीएम नीतीश कुमार। फोटो: एएनआई

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डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। Rajya Sabha Nomination: बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किए जाने के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। शहर के पुरानी बाजार, अघोरिया बाजार और Langat Singh College के बाहर चाय की दुकानों से लेकर छात्र समूहों तक इस मुद्दे पर लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।
नीतीश कुमार के वर्ष 2005 से 2026 तक लगभग दो दशक के शासनकाल को लेकर लोग अलग-अलग नजरिए से चर्चा कर रहे हैं। कई लोग इसे बिहार की राजनीति के एक लंबे दौर के रूप में याद कर रहे हैं, तो कुछ इसे राज्य की राजनीति में नए बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।
उनके शासन में बहुत कुछ बदला
पुरानी बाजार के व्यवसायी विपिन कुमार का कहना है कि वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली थी, तब राज्य की स्थिति काफी अलग थी। उनके अनुसार सड़क, बिजली और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बदलाव देखने को मिला, जिससे लोगों के जीवन में असर पड़ा।

अघोरिया बाजार में चाय की दुकान पर बैठे नीरज पाण्डेय का मानना है कि नीतीश कुमार का लंबा कार्यकाल बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। उनके मुताबिक राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करना राजनीतिक रूप से एक नए चरण की ओर संकेत करता है।
बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मिश्रा का कहना है कि इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के कारण नीतीश कुमार की पहचान बिहार की राजनीति से गहराई से जुड़ गई है। ऐसे में उनके इस कदम को लोग स्वाभाविक रूप से बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
वहीं Langat Singh College के बाहर छात्रों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा देखी गई। छात्र रिंकू गुप्ता का कहना है कि युवा वर्ग राज्य की राजनीति में नई सोच और नई ऊर्जा देखना चाहता है।
अब बिहार में बनेंगे नए समीकरण
दूसरी ओर शिवनाथ सिंह का मानना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में कई योजनाएं शुरू हुईं, जिनका असर आज भी दिखता है। उनके अनुसार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद अब बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
कुल मिलाकर शहर के विभिन्न हिस्सों में हो रही चर्चाओं से साफ है कि दो दशकों के शासनकाल को लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ इसे एक लंबे दौर की परिणति मान रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले समय में नए राजनीतिक बदलाव की भूमिका के रूप में देख रहे हैं।
