विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नेपाल के नए नियमों से भारतीय सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा, कारोबारियों की बढ़ी चिंता

Published: Tue, 21 Apr 2026 08:34 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 21 Apr 2026 09:37 PM (GMT+05:30)

नेपाल द्वारा 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर भंसार शुल्क अनिवार्य करने से भारतीय सीमावर्ती बाजारों पर बुरा असर पड़ा है।

सन्नाटे में आमतौर पर नेपाली ग्राहकों के आवागमन से जाम रहने वाला जयनगर का मेन रोड बाजार। जागरण

सन्नाटे में आमतौर पर नेपाली ग्राहकों के आवागमन से जाम रहने वाला जयनगर का मेन रोड बाजार। जागरण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण टीम, मुजफ्फरपुर। नेपाल में हाल में अपनाए गए नियमों और आदेश-निर्देश का भारतीय सीमावर्ती बाजारों पर असर हुआ है। उत्तर बिहार के जयनगर, रक्सौल व सीतामढ़ी बड़े व्यावसायिक केंद्र हैं, जहां बड़ी संख्या में नेपाली ग्राहक खुदरा से लेकर थोक में खरीदारी करते हैं।

अभी नेपाल द्वारा 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर भंसार (कस्टम शुल्क) अनिवार्य किए जाने से वहां के ग्राहकों की आवाजाही में भारी कमी है।

सीमा पर सख्ती और जांच के कारण आने से परहेज कर रहे, इससे भारतीय बाजारों की रौनक फीकी है। मधुबनी के जयनगर में रोज के कारोबार में नेपाली ग्राहकों की बड़ी भागीदारी होती है।

डेली शॉपिंग के लिए जो ग्राहक बस या ट्रेन से जयनगर पहुंच जाते थे, अब नहीं आ रहे। नेपाली ट्रेन से भी लोग कपड़ा या दैनिक उपयोगी सामान नहीं ले जा रहे हैं।

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जिला अध्यक्ष प्रीतम बैरोलिया बताते हैं कि अगर नेपाल की यही नीति रही तो सीमावर्ती जयनगर का खुदरा बाजार समाप्त हो जाएगा।

WhatsApp Image 2026-04-21 at 8.07.58 PM

प्रीतम के अनुसार, जयनगर में नेपाल से प्रतिदिन सिर्फ खुदरा में करीब ढाई से तीन करोड़ का कारोबार होता है। इसमें खाद्य सामग्री से लेकर कपड़ा आदि का कारोबार है। पर्व-त्योहार और लगन के समय में यह दोगुना तक पहुंच जाता है। प्रतिदिन पांच से छह हजार नेपाली ग्राहकों का आना-जाना होता है।

इनमें इनरवा, खजुरी, वैदेही, परबाहा, जनकपुरधाम और कुर्था के ग्राहक होते हैं। अभी यह पूरी तरह ठप है। यह स्थिति केवल जयनगर बाजार की नहीं, बल्कि यहां के लौकहा, हरलाखी, मधवापुर आदि मध्यम व छोटे बाजारों में भी है।

रक्सौल के व्यवसायियों की बढ़ी चिंता

रक्सौल से सटे नेपाल के परसा, मकवानपुर, वीरगंज तक के ग्राहक यहां रोजमर्रा का सामान खरीदने आते थे। यहां से मुख्य रूप से किराना, सब्जी, कपड़ा और मेवा आदि की खरीदारी करते हैं। मोटर या बाइक के पार्ट्स की भी खरीदारी करते थे।

चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राकेश कुशवाहा व महासचिव शंभु प्रसाद चौरसिया बताते हैं कि इतने ही दिनों में करीब 10 से 12 करोड़ रुपये तक के कारोबार पर असर पड़ा है। यहां के व्यवसायियों में चिंता बढ़ गई है।

चंपारण-सीतामढ़ी में भी सन्नाटा

पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में किराना दुकानदार पशुपति प्रसाद का कहना है कि पहले दुकान पर प्रतिदिन पांच से छह हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती थी। स्थानीय लोगों से दो से ढाई हजार रुपये तक की बिक्री हो रही है।

सीतामढ़ी में बैरगनिया, सोनबरसा, भिट्ठामोड़, सुरसंड, मेजरगंज नेपाल से सटे बाजार हैं। पहले नेपाली ग्राहक रोजमर्रा का सामान खरीदने बेधड़क आ जाते थे, अभी सन्नाटा है।

यह भी पढ़ें- भारत-नेपाल बॉर्डर पर कब थमेगी घुसपैठ-तस्करी? सीमांचल में मुख्य सचिव व डीजीपी ने अधिकारियों से किए सवाल, कहा- सख्ती करें

यह भी पढ़ें- नेपाल के ₹100 वाले नियम से मिल सकती है राहत, सांसद की पहल के बाद भारतीय सीमा पर जगी उम्मीद