दरभंगा, जेएनएन। मोस्टवांटेड गैंगस्टर और दाऊद इब्राहिम के करीबी रहे एजाज लकड़ावाला की गिरफ्तारी से जिले के फजल-उल-रहमान उर्फ फजलू का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल यह एक ऐसा नाम है जिसने अंडरवल्र्ड के दाऊद के गैंग से अलग होकर उसे परेशान ही नहीं किया बल्कि, उससे फरौती में 50 लाख रुपये भी वसूले थे। लकड़वाला और फजलू दोनों ने ही दाऊद से बगावत कर अपना अलग रास्ता चुन लिया था। 13 वर्षों से तिहाड़ एवं विभिन्न जेलों में बंद जाले थाना क्षेत्र के देउड़ा-बंधौली निवासी फजलू ने अपराध की दुनिया में वर्ष 1988 में कदम रखा था।

फ्लैशबैक..

उन दिनों में वह दाऊद तक पहुंचने का कोई सपना भी नहीं देखा था। बाइक लूट मामले में गिरफ्तार होने के बाद उसने कभी पलट कर नहीं देखा। दरभंगा जेल में उसकी मुलाकात दाऊद के राइट हैंड कहे जाने वाले बेंता निवासी जमील खान उर्फ जम्मो से हुई। चार साल के बाद जेल से बाहर आते ही उसने अपने ही शहर के चर्चित चिकित्सक डॉ. दिलीप चौधरी का अपहरण कर लिया। बताया जाता है कि फिरौती वसलूने के बाद चिकित्सक को छोड़ था। अपहरण की यह घटना जिले की पहली हाई-प्रोफाइल घटना थी। इसके बाद जमील तिहाड़ जेल चला गया। बाद में जमील ने फजलू को दिल्ली बुलाया और साथ में मिलकर दाऊद का काम करने लगा। लेकिन, एक फिरौती मामले में वसूले गए 50 करोड़ रुपये को लेकर जमील और उसके भाई चांद की हत्या नेपाल में हो गई। इसके बाद जमील की जगह फजूल दाऊद का दायां हाथ बन गया।

एेसे हुआ दाऊद से अलग

बबलू श्रीवास्तव और इरफान गोगा जैसे बड़े गैंगस्टरों से रिश्ता मजबूत होने के बाद वह और मजबूत होता चला गया। बाद में वह इरफान गोगा के लिए काम करने लगा। जबकि, लकड़वाला दाऊद के साथ था। लेकिन बाद में वह भी छोटा राजन के साथ चला गया। वर्ष 2008 में लकड़ावाला छोटा राजन से जुड़ गया। लेकिन, कुछ दिनों के बाद उसने अपना स्वतंत्र गैंग बना लिया। करोड़ों के अपहरण, हत्या, धमकी, रंगदारी जैसे 40 मामलें में आरोपित रहे फजलू ने वर्ष 1995 में दाऊद इब्राहिम से भी वसूली कर अंडरवल्र्ड की दुनिया में तहलका मचा दिया था। दाऊद इब्राहिम के बहनोई हामिद अंतुले से हैदराबाद में 50 लाख फिरौती की मांग की।

दाऊद से वसूले 50 लाख रुपये

दाऊद के भाई अनीश के कहने पर उसने कहा था कि मेरा बॉस दाऊद नहीं इरफान गोगा है। आखिरकार दाऊद ने बहनोई के लिए 50 लाख रुपए भिजवाए और बहनोई का फजलू से पीछा छुड़वाया। दुबई, थाईलैंड, मलेशिया और नेपाल में रहकर फरौती की घटना को लगातार अंजाम देकर इंटरपोल को परेशान कर दिया। जिसके बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।

दस दिनों के पैरोल पर आया था गांव

नौ साल की खोज के बाद से वर्ष 2006 में उसे नेपाल बॉडर से दबोचा गया। लेकिन, काफी जांच के बाद भी उसके खिलाफ किसी आतंकवादी वारदात में शामिल होने की कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया। वर्ष 2018 में वह दस दिनों के पैरोल पर अपने गांव आया था। अपने भतीजा मुजतुबा आरजू की शादी में भाग लेने के आया था। 20 अप्रैल को कमतौल थाना क्षेत्र के कतरौल गांव में बारात गई थी और 24 अप्रैल को वलीमा का आयोजन था। इस दौरान बताया था कि आंतकी गतिविधि वाले लोगों से उसे नफरत है। गांव में कई बार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की छापेमारी पर कहा कि यह देश की बड़ी संस्था है। जो बिना साक्ष्य का हाथ नहीं डालती है। युवाओं को देश के प्रति वफादार होने का आह्वान किया था। 

लकड़ावाला के संपर्क में था जाले का दो युवक 

एजाज लकड़ावाला को जब पटना के मीठापुर बस स्टैंड से मुंबई क्राइम ब्रांच और पटना एसटीएफ की टीम ने 9 जनवरी को दबोचा तो दरभंगा के जाले थाना क्षेत्र का नाम सामने आया। पूछताछ में लकड़वाला ने बयान दिया है कि वह नेपाल से पटना होते हुए दरभंगा जाने वाला था, जहां जाले का दो युवक उसे साथ ले जाता और अपने यहां रखकर उसके नाम से आधार कार्ड बनवा देता। इसके बाद उस आधार पर वह तीसरा फर्जी पासपोर्ट बनाने में वह कामयाब हो जाता।

 इससे पूर्व लकड़ावाला की गिरफ्तारी पुत्री के मोबाइल की जांच के दौरान यह पता चला था कि वह बिहार के दरभंगा जिले के किसी व्यक्ति से लगातार बातचीत कर रही है। दोनों ही मामलों में पुलिस सही तह तक पहुंचने में लगी है। सूत्रों की मानें तो पटना एटीएस और एसटीएफ की टीम उन दोनों युवकों की तलाश में है। ऐसे जाले के देउरा-बंधौली ही एक ऐसा गांव है जहां दाउद के ही नहीं बल्कि, इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) प्रमुख यासिन भटकल के करीबी लोग भी रह चुके हैं। इस गावं से  नदीम और नकी को गिरफ्तार किया गया था। 

स्पेशल ब्रांच की सूची में दरभंगा के लोगों का नाम शामिल

स्पेशल ब्रांच ने सक्रिय आतंकी संगठनों की जो सूची जारी कर रखी है, उसमें 37 सदस्यों में दरभंगा के भी कई लोग शामिल है। सूची में शामिल 10 लोग अब भी फरार हैं, जबकि, सात लोग ट्रेसलेस है। इसमें 11 जमानत पर हैं, दो की मौत हो चुकी है और शेष सात विभिन्न जेलों में बंद है। मधुबनी के कमाल हुसैन उर्फ कमाल, मफील अहमद, नफीज अहमद शेख और दरभंगा के नक्की अहमद, नदीम अख्तर, दानिश अंसारी, शकील अनवर हाशमी उर्फ मोहम्मद जजवी, मो. अब्दुल रहमान, मो. शमसे आलम उर्फ सन्नी उर्फ शमसूल, महताब खुर्शीद आलम शेख, जाहिद शेख, पप्पू शकील शेख, रफी अहमद, निराले अहमद, फांसी की सजा पाए तहसीन अख्तर उर्फ मोनू उर्फ सहन उर्फ मेमन शामिल है। इसमें एक कतील सिद्दीकी की मौत हो चुकी है। 

Posted By: Murari Kumar

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