मुजफ्फरपुर में मानवता शर्मसार, इलाज के लिए गुहार लगाती रही महिला, ट्राली पर ही तड़प तड़प कर मौत
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में सड़क हादसे में घायल एक महिला की इलाज के अभाव में ट्रॉली पर ही मौत हो ...और पढ़ें

एसकेएमसीएच में इलाज के इंतजार में महिला।
HighLights
मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच में इलाज न मिलने से घायल महिला की मौत।
एक घंटे से अधिक समय तक ट्रॉली पर ही पड़ी रही महिला।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । उत्तर बिहार का एम्स कहे जाने वाले एसकेएमसीएच में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना फिर सामने आई है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक महिला की यहां इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
स्वजन ने आरोप लगाया कि महिला को अस्पताल लाने के बाद भी एक घंटे से अधिक समय तक ट्राली पर ही छोड़ दिया गया। दर्द से छटपटाने के बावजूद किसी भी चिकित्सक या नर्स ने इलाज तो दूर हाथ तक नहीं लगाया।
अंततः महिला ने दम तोड़ दिया। महिला सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाना क्षेत्र के सिवाईपट्टी गांव निवासी स्व. महेश्वर प्रसाद सिंह की पत्नी रानी कुमारी थीं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया।
स्वजन ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय रहते रानी कुमारी को प्राथमिक उपचार भी मिल जाता, तो उनकी जान बच सकती थी। वह लगातार दर्द से कराहती रहीं।
इलाज के लिए गुहार लगाती रहीं, लेकिन अस्पताल कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। मौत की खबर फैलते ही अस्पताल में मौजूद स्थानीय लोग और मरीज के स्वजन आक्रोशित हो गए। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए हंगामा किया।
शिफ्ट चेंज का समय होने से नहीं शुरू हो सका इलाज
बताया जा रहा है कि शिफ्ट चेंज का समय था। कर्मियों ने चिकित्सकों के तुरंत बाहर निकलने की जानकारी स्वजन को दी थी। उस समय जूनियर चिकित्सक ड्यूटी पर थे। सीनियर के आने का इंतजार करने को कहा।
इस कारण समय बीतता चला गया। अंत में बिना इलाज महिला ने दम तोड़ दिया। दोपहर में इमरजेंसी वार्ड में दो से आठ बजे तक डयूटी होती है। अधिकतर सीनियर चिकित्सक समय से पहले जूनियर के भरोसे वार्ड छोड़कर चले जाते हैं।
नाइट शिफ्ट के चिकित्सक विलंब से आते हैं। नियमित: बिना अगली शिफ्ट के चिकित्सक के आए ड्यूटी वालों को स्थल नहीं छोड़ना है। हादसे में घायल महिला शाम 7:25 बजे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल हुई थी। उनका इलाज शुरू नहीं हो सका।
बिचौलियों का राज
आक्रोशित लोगों ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना था कि सुबह से शाम तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन एसकेएमसीएच की जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहां मरीज की मौत होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन कागजात को बैक-डेट में अपडेट कर डेथ डिक्लेयर करता है, ताकि बाद में किसी भी जांच या कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
नर्स नहीं, वार्ड बाय लगाते हैं इंजेक्शन
अस्पताल की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वजन ने बताया कि इमरजेंसी और वार्डों में नर्सों की जगह वार्ड ब्वाय मरीजों को इंजेक्शन और सलाइन (ड्रिप) चढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, अस्पताल में सक्रिय बिचौलिये मरीजों की ड्रेसिंग तक का काम करते हैं।
अस्पताल की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए तैनात हेल्थ मैनेजर अक्सर ड्यूटी स्थल से नदारद रहते हैं। इससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव बना हुआ है। इधर, अधीक्षक डा. महेश प्रसाद ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
