बिहार में इंजन और अस्पताल के बाद अब पीपा पुल की चोरी, मुजफ्फरपुर में काटकर बेच रहे नशेड़ी
Bihar Bridge Theft News:मुजफ्फरपुर के मुशहरी में आथर घाट पर पड़े ऐतिहासिक पीपा पुल को नशेड़ी काटकर कबाड़ में बेच ...और पढ़ें

नदी किनारे पड़े जर्जर पुल को काटकर बेच रहे नशेड़ी। फोटो: जागरण
HighLights
मुजफ्फरपुर में ऐतिहासिक पीपा पुल की चोरी हो रही है।
नशेड़ी और चोर पुल को काटकर कबाड़ में बेच रहे हैं।
प्रशासन की अनदेखी से लाखों का सरकारी लोहा बिक रहा।
संवाद सहयोगी, मुशहरी (मुजफ्फरपुर)। Muzaffarpur Pipa Pul Theft: बिहार में चोरी की कहानियां अक्सर देश भर में अचरज और चर्चा का विषय बन जाती हैं। बेगूसराय के गरहरा यार्ड से सुरंग बनाकर पूरा डीजल रेल इंजन गायब कर दिया गया।
पूर्णिया में कागजों पर पूरा रेलवे स्टेशन और पटरी कबाड़ में बेच दिया। मधेपुरा और सहरसा में रातों-रात सरकारी अस्पताल गायब हो गया।
बिहार की माटी पर अजूबों की कोई कमी नहीं है। इसी कड़ी में अब एक नया अध्याय मुजफ्फरपुर जिले से जुड़ गया है।

पुल के इन जर्जर हिस्सों पर पशासन का ध्यान नहीं होने की वजह से रोज इसको काटकर बेचा जा रहा है।
मुजफ्फरपुर में पुल की चोरी
मुजफ्फरपुर के मुशहरी स्थित आथर घाट पर पड़े ऐतिहासिक पीपा पुल पर नशेडियों और चोरों की नजर पड़ गई है।
सिर आथर, दरधा और मुहम्मदपुर गांव के पास बूढ़ी गंडक नदी किनारे लावारिस स्थिति में पड़े इस लोहे के पीपा पुल को नशेड़ी धीरे-धीरे काटकर कबाड़ में बेच रहे हैं। पुल के ऊपरी हिस्से को लगभग काटकर साफ किया जा चुका है।
नीतीश ने कराया था जीर्णोद्धार
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पीपा पुल की मरम्मत कराकर आवागमन बहाल कराया था।
बाद में रखरखाव के अभाव में यह जर्जर होता गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने पक्के पुल के लिए बड़ा आंदोलन किया।
मुख्यमंत्री ने आथर घाट पर पक्के पुल का शिलान्यास किया, जिसका निर्माण कार्य वर्ष 2014 में शुरू हुआ और करीब 9 साल बाद पूरा हुआ।

इसी स्थाई पुल बनने के बाद पीपा पुल जर्जर हो गया और अब चोरी का शिकार हो रहा।
पीपा पुल नशेड़ियों का शिकार
पक्का पुल बनने के बाद पीपा पुल से आवागमन बंद हो गया। दरधा और मुहम्मदपुर के ग्रामीणों ने इसे दरधा घाट पर लगाकर नया रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बाढ़ के कारण पुल के टुकड़े नदी किनारे अलग-अलग हिस्सों में बिखर गए।
सिरआथर निवासी होटल राय बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर नियमित रखरखाव का खर्च उठाना संभव नहीं था।
प्रशासन की परेशान करने वाली चुप्पी
स्थानीय निवासी पंकज ठाकुर और देवव्रत कुमार सहनी का कहना है कि यदि प्रशासन इस लावारिस पड़े पीपा पुल के सभी हिस्सों को जोड़कर दरधा घाट पर स्थापित कर देता, तो ग्रामीणों को 5 किलोमीटर की घूमकर जाने वाली दूरी के बजाय मात्र आधा किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता।
ग्रामीणों ने इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) को आवेदन देकर मरम्मत कराने की गुहार भी लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि आज लाखों का सरकारी लोहा कबाड़ के भाव बिक रहा है।
